Home Uncategorized भारत ने हमेशा से शांति,एकता और सद्भावना का संदेश दिया : मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी Lokmat Live

भारत ने हमेशा से शांति,एकता और सद्भावना का संदेश दिया : मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी Lokmat Live

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मन की बात कार्यक्रम के जरिए 37वीं बार लोगों को संबोधित किया । मन की बात की शरुआत प्रधानमंत्री ने हाल ही में सम्पन्न हुए लोकआस्था का महापर्व छठ से की ,मोदी ने कहा कि 
दीपावली के छह दिन बाद मनाए जाने वाला महापर्व छठ, हमारे देश में सबसे अधिक नियम निष्ठा के साथ मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक है। जिसमें खान-पान से लेकर वेशभूषा तक, हर बात में पारंपरिक नियमों का पालन किया जाता है। छठ-पूजा का अनुपम-पर्व प्रकृति से और प्रकृति की उपासना से पूरी तरह जुड़ा हुआ है। सूर्य और जल, महापर्व छठ की उपासना के केंद्र में हैं , तो बांस और मिट्टी से बने बर्तन और कंदमूल, इनकी पूजन-विधि से जुड़ी अभिन्न सामग्रियाँ हैं।
आस्था के इस महापर्व में उगते सूर्य की उपासना और डूबते सूर्य की पूजा का सन्देश अद्वितीय संस्कार से परिपूर्ण है। दुनिया तो उगने वालों को पूजने में लगी रहती है लेकिन छठ-पूजा हमें, उनकी आराधना करने का भी संस्कार देती है जिनका डूबना भी प्रायः निश्चित है। हमारे जीवन में स्वच्छता के महत्व की अभिव्यक्ति भी इस त्योहार में समाई हुई है। छठ से पहले पूरे घर की सफाई, साथ ही नदी, तालाब, पोखर के किनारे, पूजा-स्थल यानि घाटों की भी सफाई, पूरे जोश से सब लोग जुड़ करके करते हैं। सूर्य वंदना या छठ-पूजा – पर्यावरण संरक्षण, रोग निवारण व अनुशासन का पर्व है। 
प्रधानमंत्री को एक आए हुए कॉल का जवाब देते हुए मोदी ने बच्चो को शारीरिक मेहनत और योगा से जुड़ी हुई बाते पर जोड़ देते हुए कहा कि

Dinner के बाद पूरा परिवार बच्चों को लेकर के कुछ walk करने का प्रयास करें। Yoga for Young India। योग, विशेष रूप से हमारे युवा मित्रों को एक healthy lifestyle बनाये रखने और lifestyle disorder से बचाने में मददगार सिद्ध होगा। School से पहले 30 मिनट का योग, देखिए कितना लाभ देगा! घर में भी कर सकते हैं और योग की विशेषता भी तो यही है – वो सहज है, सरल है, सर्व-सुलभ है और मैं सहज है इसलिए कह रहा हूँ कि किसी भी उम्र का व्यक्ति आसानी से कर सकता है।
सरल इसलिए है कि आसानी से सीखा जा सकता है और सर्व-सुलभ इसलिए है कि कहीं पर भी किया जा सकता है – विशेष tools या मैदान की ज़रूरत नहीं होती है।
Diabetes control करने में योग कितना असरकारी है, इस पर कई studies चल रही हैं। AIIMS में भी इस पर study की जा रही है और अभी तक जो परिणाम आए हैं, वो काफी encouraging हैं। आयुर्वेद और योग को हम सिर्फ उपचार treatment के माध्यम के तौर पर न देखें, उन्हें हम अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। 
खादी की बढ़ती लोकप्रियता के बारे में मोदी ने बात करते हुए कहा कि 

 पहले खादी, ‘Khadi for nation’ था और हमने ‘Khadi for fashion’ की बात कही थी, लेकिन पिछले कुछ समय से मैं अनुभव से कह सकता हूँ कि Khadi for nation और Khadi for fashion के बाद अब, Khadi for transformation की जगह ले रहा है। खादी ग़रीब से ग़रीब व्यक्ति के जीवन में, hand-loom ग़रीब से ग़रीब व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाते हुए उन्हें सशक्त बनाने का, शक्तिशाली साधन बनकर के उभर रहा है। ग्रामोदय के लिए ये बहुत बड़ी भूमिका अदा कर रहा है। 
31 अक्टूबर को सरदार भल्लभ भाई पटेल की जन्म जयंती पर पूरे देश मे आयोजित एकता के लिए दौड़ कार्यक्रम की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने सरदार पटेल के बारे में कहा कि 


हम सब जानते हैं कि आधुनिक अखण्ड भारत की नींव, इन्होंने ही रखी थी। भारत माँ की उस महान संतान की असाधारण यात्रा से आज हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। 31 अक्तूबर को श्रीमती इंदिरा गाँधी भी इस दुनिया को छोड़ करके चली गईं। सरदार वल्लभ भाई पटेल की विशेषता ये थी कि वे न सिर्फ़ परिवर्तनकारी विचार देते थे, लेकिन वे, इसको कर दिखाने के लिए जटिल-से-जटिल समस्या का व्यावहारिक हल ढूंढने में क़ाबिल थे। विचार को साकार करना, उसमें उनकी महारत थी। सरदार वल्लभ भाई पटेल ने भारत को एक सूत्र में पिरोने की बागडोर संभाली। ये सुनिश्चित किया कि करोड़ों भारतवासियों को ‘एक राष्ट्र और एक संविधान’ की छत्रछाया में लाया जाए।
उनके निर्णय क्षमता ने उन्हें सारी बाधाओं को पार करने का सामर्थ्य दिया। जहाँ मान-मनौवल की आवश्यकता थी, वहाँ उन्होंने मान-मनौवल किया; जहाँ बल-प्रयोग की आवश्यकता पड़ी, वहाँ बल-प्रयोग किया। उन्होंने एक उद्देश्य निश्चित कर लिया और फिर केवल उसी ओर पूरी दृढ़ता के साथ वो बढ़ते ही गए, बढ़ते ही गए। देश को एक करने का ये कार्य सिर्फ़ वही कर सकते थे, जिन्होंने एक ऐसे राष्ट्र की परिकल्पना की जहाँ सभी लोग समान हों, उन्होंने कहा था और मैं चाहूँगा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल की बात सदा-सर्वदा हम लोगों के लिए प्रेरणा देने वाली हैं। उन्होंने कहा था – “जाति और पंथ का कोई भेद हमें रोक न सके, सभी भारत के बेटे और बेटियाँ हैं, हम सभी को अपने देश से प्यार करना चाहिए और पारस्परिक प्रेम और सद्भावना पर अपनी नियति का निर्माण करना चाहिए।” 
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