Home Uncategorized दिल्ली में प्रदूषण का उच्चतम स्तर , सांस लेने का मतलब 50 सिगरेट रोज पाना

दिल्ली में प्रदूषण का उच्चतम स्तर , सांस लेने का मतलब 50 सिगरेट रोज पाना

2 second read
दिल्ली : दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ चुका है। राजधानी में सांस लेने का मतलब रोज 50 सिगरेट पीना। दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सीधा-सीधा जिम्मेदार पड़ोसी राज्यों को ठहराया है।

दिल्ली में हवा की गुणवत्ता का सूचकांक 451 तक जा पहुंचा है, जबकि इसका अधिकतम स्तर 500 है। इस हवा में सांस लेने का मतलब है करीब 50 सिगरेट रोज पीने जितना धुआं आपके शरीर में चला जाता है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अनुसार, यह स्वास्थ्य की आपात स्थिति है, क्योंकि शहर व्यावहारिक रूप से गैस चैंबर में बदल गया है। बीमार लोगों के अलावा स्वस्थ लोगों के लिए भी यह हवा हानिकारक है।
वायु प्रदूषण हर साल दिल्ली में 3,000 मौतों के लिए जिम्मेदार है, यानी हर दिन आठ मौतें। दिल्ली के हर तीन बच्चों में से एक को फेफड़ों में रक्तस्राव की समस्या हो सकती है। अगले कुछ दिनों तक घर के अंदर रहने और व्यायाम या टहलने के लिए बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।
आईएमए के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, “धुंध एक जटिल मिश्रण है और इसमें विभिन्न प्रदूषक तत्व जैसे नाइट्रोजन ऑक्साइड और धूल कण मिले होते हैं। यह मिश्रण जब सूर्य के प्रकाश से मिलता है तो एक तरह से ओजोन जैसी परत बन जाती है। यह बच्चों और बड़ों के लिए एक खतरनाक स्थिति है। फेफड़े के विकारों और श्वास संबंधी समस्याओं वाले लोग इस स्थिति में सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।”
आईएमए ने दिल्ली-एनसीआर के सभी स्कूलों के लिए सलाह या एडवाइजरी जारी करने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री से पहले ही अपील की है, ताकि रेडियो, प्रिंट और सोशल मीडिया जैसे विभिन्न मीडिया माध्यमों से इसे प्रसारित किया जा सके। 19 नवंबर को एयरटेल दिल्ली हाफ मैराथन को रद्द करने के लिए भी अनुरोध किया है।
SMOG किसे कहते हैं

जब भी आद्र्रता का स्तर उच्च होता है, वायु का प्रवाह कम होता है और तापमान कम होता है। जब कोहरा बन जाता है तो इससे बाहर देखने में दिक्कत आती है और सड़कों पर दुर्घटनाएं होने लगती हैं। रेलवे और एयरलाइन की सेवाओं में भी देरी होने लगती है। जब वातावरण में प्रदूषण का स्तर उच्च होता है तो प्रदूषक कण कोहरे में मिल जाते हैं, जिससे बाहर अंधेरा छा जाता है। इसे ही स्मॉग कहा जाता है।
SMOG से क्या क्या समस्याएँ होती है
स्मॉग के कारण होने वाली बहुत समस्याएं हैं। धुंध फेफड़े और हृदय दोनों के लिए बहुत खतरनाक होती है। सल्फर डाइऑक्साइड की अधिकता से क्रोनिक ब्रॉन्काइटिस हो जाती है। उच्च नाइट्रोजन डाइऑक्साइड स्तर से अस्थमा की समस्या बढ़ जाती है। पीएम10 वायु प्रदूषकों में मौजूद 2.5 से 10 माइक्रोन साइज के कणों से फेफड़े को नुकसान पहुंचता है। 2.5 माइक्रोन आकार से कम वाले वायु प्रदूषक फेफड़ों में प्रवेश करके अंदर की परत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। रक्त में पहुंचने पर ये हृदय धमनियों में सूजन कर सकते हैं।

Load More Related Articles
Load More By Ashish Ranjan
Load More In Uncategorized

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Check Also

बलिदान दिवस पर याद की गईं रानी लष्मी बाई और रानी दुर्गावती

 अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा द्वारा प्रदेश कार्यालय पर रानी लष्मी बाई और रानी दुर्गावती का…