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सिमटते जनाधार और राजनीति में हाशिए पर आने के भय से आरक्षण का राग अलाप रहे नीतीश कुमार:ललन सिंहLokamt Live

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मोकामा: जन अधिकार पार्टी के प्रदेश महासचिव ललन सिंह ने मोकामा में अपने कार्यकर्ताओं के बीच बैठक कर बिहार सरकार और नीतीश कुमार पर जमकर हमला बोला।

ललन सिंह ने नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा कि महगठबंधन से मोहभंग होते ही अपने सिमटते जनाधार और राष्ट्रीय राजनीति में हाशिए पर आ जाने के भय से ‘सत्तापिपासु’ नीतीश कुमार ने निजी क्षेत्रों में आरक्षण का नया राजनीतिक शिगूफ़ा छेड़ा है। निजी क्षेत्रों और आउटसोर्सिंग में आरक्षण का ये फ़ैसला न सिर्फ बिहार की प्रतिभा पर कुटिल कुठाराघात है बल्कि बतौर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की व्यक्तिगत तथा नीतिगत असफलता और पिछड़ी सोच को उद्घाटित करता है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में उद्योग धंधों की बदहाली पर ‘धृतराष्ट्र’ और किसानों की समस्या पर ‘कुंभकर्ण’ बने नीतीश ने अपना राजनीतिक वजूद बचाये रखने की महत्वाकांक्षा में ये दांव खेला है। आज जबकि देश-दुनिया वैज्ञानिक सोच के साथ आगे बढ़ते हुए मंगल ग्रह तक पहुँच चुका है तो ऐसे में नीतीश कुमार जैसे अदूरदर्शी और पाषाण कालीन मानसिकता वाले नेता स्वार्थसिद्धि के लिए समाज में जाति की खाई खोदने का दुराग्रह कर रहे हैं।

बिहार में पलायन के मुद्दे पर बोलते हुए ललन सिंह ने कहा कि प्रदेश से प्रतिभा पलायन रोकने के वादे के साथ सत्ता में आये नीतीश कुमार आखिर क्यों अपनी विद्वेषपूर्ण नीतियों के जरिये बिहार में बचे-खुचे रोजगार के मौकों की भी लंका लगाने पर आमादा हैं ? नीतीश को पिछड़े और अतिपिछड़े समाज की इतनी ही परवाह है तो वे बिहार में मुट्ठी भर प्राइवेट और आउटसोर्सिंग नौकरियों में भी आरक्षण लाने की बजाय बिहार सरकार के विभिन्न विभागों में रिक्त लाखों पदों पर वैकेंसी निकाल, संविधान प्रदत्त आरक्षण के हिसाब से दलित व पिछड़ों को नौकरी क्यों नहीं दे देते ?

अपने 12 साल के कार्यकाल में बिहार में बड़ी संख्या में रोजगार उत्पन्न करने वाले उद्योग-धंधे लाने में विफल रहे नीतीश बाबू भविष्य में बाहरी निवेश और प्राइवेट इंडस्ट्री के आगमन की संभावनाओं का कब्र खोद रहे हैं। अपनी डूबती राजनीति की नैया बचाने के चक्कर में बिहार का बेड़ा गर्क मत करिये नीतीश जी।

आरक्षण-आरक्षण रटकर राष्ट्रीय राजनीति में प्रासंगिक होने की कुचेष्टा करते नीतीश जी पहले आत्मनिरीक्षण क्यों नहीं करते ? बिहार के सरकारी स्कूलों-कॉलेजों और हस्पतालों की दुर्दशा किसी से छुपी नहीं है। सरकारी स्कूल-अस्पतालों में ज्यादातर गरीब और निचले तबके के लोग ही जाते हैं। अगर नीतीश जी सही मायने में इनके सच्चे हितैषी हैं तो लगभग डेढ़ दशक से मुख्यमंत्री की कुर्सी से ‘अवसरवाद’ के फेविकॉल के सहारे चिपके रहने के बाद भी इन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए क्या किया ?

आखिर क्यों सुशासन बाबू समाज की आखिरी कतार में खड़े लोगों को सही तरह से शिक्षित, स्वस्थ और स्किल्ड बनाने की बजाय उन्हें बहला-फुसलाकर आरक्षण का लॉलीपॉप थमाने का कुचक्र रच रहे हैं ?

भाजपा पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि विडंबना तो ये है कि “सबका साथ, सबका विकास” का ढिंढ़ोरा पीटने वाली भाजपा भी नीतीश के इस तुगलकी फरमान में सहभागी बनी हुई है और कमंडल की राजनीति करते-करते मंडल की राजनीति को भी निहायत ही बेशर्मी के साथ अंगीकार कर लिया है। यदि भाजपाई निजी और आउटसोर्सिंग के क्षेत्र में आरक्षण के हामी हैं तो वे अपना ये नारा “सबका साथ, सबका विकास मायनस सामान्य/सवर्ण वर्ग” क्यों नहीं कर लेते ?

सी पी ठाकुर जी को छोड़कर सवर्णों के सभी तथाकथित और स्वघोषित सिरमौर नीतीश के इस पक्षपातपूर्ण और सरासर अनुचित कदम पर मुंह में दही जमाये बैठे हैं। चाहे वो मूंछ पर ताव देने वाले बाहुबली विधायक हों या अपने देशवासियों का पाकिस्तान का वीजा लगवाने वाले बड़का मंत्री, या फिर हमारे अपने ओजस्वी धरतीपुत्र! किसी ने कोई विरोध प्रदर्शन करना तो दूर एक बयान तक देना मुनासिब नहीं समझा। वो हमारा क्या प्रतिनिधित्व करेंगे जिन्होंने अपने स्वाभिमान को इस कुत्सित राजनीति के नाले में बहा अपने सांसद, विधायक और मंत्री-प्रवक्ता पद से जियरा जुड़ाये बैठे हैं।

अपने कार्यकर्ताओं से बातचीत के क्रम में ललन सिंह कहा कि अब सवाल ये है कि क्या हम भी हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाएँ और अपना एवं आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का तमाशा बनते यूँ ही टुकुर-टुकुर देखते रहें ! या फिर इस सियासी षड्यंत्र और इस लक्षित अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करें और पूरे दमखम से अपना अधिकार मांगें!
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One Comment

  1. brhma nand

    November 13, 2017 at 2:28 pm

    Mokama se Bihar or central tak awaz jani chahiye

    Reply

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