Home राजनीति गुजरात चुनाव: शरद भारतीय ट्राइबल पार्टी के चुनाव चिन्ह ‘ ऑटोरिक्शा ‘ की सियासी सवारी करेंगे

गुजरात चुनाव: शरद भारतीय ट्राइबल पार्टी के चुनाव चिन्ह ‘ ऑटोरिक्शा ‘ की सियासी सवारी करेंगे

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जनता दल यूनाइटेड ( JDU ) पर अपना दावा हारने के बाद भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी ) के चुनाव चिन्ह पर कांग्रेस के साथ शरद यादव लड़ेंगे चुनाव। जदयू पर दावा हारने के बाद चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं, कहा अदालत जाने पर कर रहा हूँ गौर।

जनता दल यूनाइटेड पार्टी पर अपना दावा कर रहे थे शरद यादव। इस दावे की लड़ाई पर चुनाव आयोग ने अपना फैसला नीतीश खेमे के पक्ष में सुनाया। शरद यादव ने जदयू पर अपने दावे को खारिज करने के चुनाव आयोग के इस फैसले पर गंभीर सवाल भी उठाया। शरद यादव का साफ कहना है कि चुनाव आयोग केंद्र की सत्ता के प्रभाव में उनके गुट के तथ्यों को दरकिनार करते हुए नीतीश खेमे के पक्ष में फैसला सुनाया है।
अब जदयू पर दावे की लड़ाई हारने के बाद शरद अपनी राजनीतिक लड़ाई के लिए नई पार्टी बनायेंगे। मगर नई पार्टी बनाने से पहले गुजरात चुनाव में शरद का कांग्रेस के साथ मिलकर नई सिंबल पर चुनाव लड़ने की सहमति बन गई है। शरद यादव भारतीय ट्राइबल पार्टी ( बीटीपी ) के चुनाव चिन्ह ‘ ऑटोरिक्शा ‘ की सियासी सवारी करेंगे।
ऑटोरिक्शा सिंबल वाली बीटीपी पार्टी गुजरात के विधायक छोटुभाई वसावा की है जिन्हें शरद गुट ने अपने जदयू का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था। वसावा के गुजरात मे आदिवासी इलाके में प्रभाव को देखते हुए उनकी बीटीपी को 5 सीटें देने पर कांग्रेस राजी हो गयी है। इससे साफ है कि राज्यसभा चुनाव में वसावा और शरद के अहम योगदान को कांग्रेस नहीं भूली है।
चुनाव आयोग के फैसले पर शरद ने कहा कि भाजपा से हाथ मिलाने वक़्त नीतीश कुमार ने डबल इंजन जुड़ने की बात की थी और आयोग के फैसले में इसी डबल इंजन की ताकत लगी है। आयोग के फैसले से उनकी राज्यसभा सदस्यता रद्द करने के विचाराधीन मामले पर असर के सवाल पर शरद ने कहा कि वे इससे नहीं डरते और जनता के बीच जाकर न्याय की लड़ाई लड़ेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी पर भी गुजरात चुनाव को लेकर निशाना साधा

मूडीज आईएमएफ के भारत के रेटिंग बढ़ाने के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये दावे देश के असली आर्थिक और सामाजिक तस्वीर से मेल नही खाती। मूडीज के रेटिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि गुजरात चुनाव को देखते हुए ऐसे दावें कराये जा रहे हैं। ऐसी कौन सी परिस्थिति आ गई कि देश के प्रधानमंत्री को अपने गृह राज्य में ही 53 सभाएं करने की जरूरत पड़ रही है। अगर तस्वीर सब कुछ ठीक रहती तो प्रधानमंत्री मोदी को अपने गृह राज्य में 53 सभाएं करने की जरूरत नहीं होती।
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