Home बिहार राजद समर्थकों का गुंडा राज,बिहार बंद के बवाल से दहला बिहार सड़क पर हुआ लौंडा नाच

राजद समर्थकों का गुंडा राज,बिहार बंद के बवाल से दहला बिहार सड़क पर हुआ लौंडा नाच

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बिहार बंद के दौरान पूरे बिहार में दिखी आतंकराज की झलक ने जनता को हिला कर रख दिया है…कई जगहों पर सरेआम गुंडागर्दी देखने को मिली….. क्या ऐसे बढ़ेगा बिहार?

 

आज का बिहार बंद सरकार की गुंडागर्दी के विरोध में आहूत है। परन्तु बंद समर्थकों की गुंडागर्दी इस बात को प्रभावहीन बना रही है। इस समस्या के जड़ में राजद का लूटेरा तंत्र ही है जिसने बालू को नदी से नदारद कर दिया। बिहार राजनीति की चक्की में पिस रहा है। कोई पार्टी नहीं जिसकी सोंच जनविरोधी न हो।
क्यूंकि हमारा संविधान किसी भी संस्था या पार्टी को मानवीय मूल्यों तथा अधिकारों को हनन की इज़ाज़त नहीं देती हैं और कोई भी राजनितिक पार्टी संविधान से तथा आम नागरिक के अधिकारों से ऊपर नहीं हैं क्यूंकि नेता को जनता हीं अपने वोट से चुनती हैं, इसीलिए जनता को जनार्दन की भी उपाधि दी जाती हैं

राजद की शह पर बालू माफियाओं ने कई जगहों पर अपने ट्रक लगा कर जबरन सड़क जाम किया जिससे सैकड़ों गाडियां तथा एंबुलेंस जाम में फंसे रहें, और कुछ मरीजों की मौत तक हो गयी लेकिन बजाए उनकी मदद करने के राजद के समर्थक ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते और गाते हुए नारेबाजी में व्यस्त रहे. राजद सुप्रीमों जवाब दें कि क्या बंद के कारण हुई मौतों की जिम्मेवारी वह लेंगे? लालू जी यह भी बताएं कि क्या बंद का मतलब लोगों को मारना होता है? गोपालगंज में हुए इतने बड़े हादसे के बाद भी इन लोगों को आमजन के दुःख-दर्द परवाह नहीं हुई, यहां तक कि वहां के घायल मरीजों को भी बालू माफ़िया के लोग और राजद समर्थक बंद के नाम पर पटना पंहुचने से रोक रहे थे साथ ही जो लोग हॉस्पिटल से अपने गांव लौट रहे थे इन लोगों ने उन्हें भी नही बख्शा और गाड़ी से उतार सड़क पर बैठा दिया. लालू जी बिहार की जनता को जवाब दें की इन लोगों की क्या गलती थी ?

राजद की बिहार बंदी के दौरान एक मरीज की एंबुलेंस में मौत हो गयी।  पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ.रघुवंश प्रसाद सिंहजी ने कहा, बंदी में यह सब होते रहता है।’ क्या रघुवंश बाबू या आपके परिवार से जुड़े किसी के साथ यह घटित होती तो यही बोल होते..?

अब सवाल यह है कि यह बंदी किसके लिए है लालूजी? क्या जनता को न्याय दिलाने के लिए..! क्या बाढ़ पीडि़तों को हक दिलाने के लिए…? क्या ठेका कर्मियों को समान काम के लिए समान वेतन का हक दिलाने के लिए..? या अपनी पार्टी के उन राइफलधारियों का बालू का कारोबार बचाने के लिए जो आपकी पार्टी की रीढ़ हैं.?

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