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तीन तलाक बिल लोकसभा में पास,तीन तलाक बोलने पर 3 साल तक सजा और जुर्माने का प्रावधान

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मुस्लिम महिलाओं को हक दिलानेवाला तीन तलाक बिल आज लोकसभा में पास हो गया. मतलब ये किानून बनने के बाद अगर किसी ने

👉 तीन बार तलाक कहकर रिश्ता तोड़ा तो वो गैर-कानूनी ही नहीं होगा, ऐसा करनेवाले को जुर्माने के साथ तीन साल तक की सजा का प्रावधान है. मुस्लिम महिलाएं लोकसभा में बिल पास होने पर जश्न मना रही हैं लेकिन ओवैसी और दूसरे मुस्लिम नेता बिल को मुस्लिमों के मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन बता रहे हैं.

लोक सभा में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद तीन तलाक रुक नहीं रहे, ऐसे में तीन तलाक को खत्म करने वाला कानून लाना जरूरी है. बिल के कानून बनने के बाद एक बार में तीन तलाक कहकर तलाक देना गैर कानूनी होगा. इसके साथ ही बोलकर, लिखकर, व्हाट्सऐप, फेसबुक से तलाक देना भी अपराध होगा.

एक बार में तीन तलाक बोलने पर 3 साल तक सजा हो सकती है. इसमें भारी जुर्माने का भी प्रावधान है. जुर्माने की रकम से पीड़ित महिला को गुजारा भत्ता दिया जाएगा. नाबालिग बच्चे को रखने का अधिकार महिला के पास होगा. गुजारा भत्ता और बच्चों के भविष्य को लेकर सुनवाई कर रहे मजिस्ट्रेट फैसला करेंगे. आरोपी को पुलिस से जमानत नहीं मिलेगी, मजिस्ट्रेट ही जमानत दे सकता है.

👉 कांग्रेस ने बिल का विरोध तो नहीं किया लेकिन इसमें सुधार के लिए इसे स्टैंडिंग कमिटी के पास भेजने की मांग की है. लेकिन सरकार ने साफ कहा है कि कांग्रेस को जो भी एतराज हैं वो बहस में बताए, जो सुझाव सही होंगे उन्हें स्वीकार किया जाएगा.

👉 तीन तलाक के बिल का ओवैसी की पार्टी के साथ साथ आरजेडी, बीजेडी, टीएमसी ने विरोध किया है. असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि तीन तलाक पर बिल मूलभूत अधिकारों को उल्लंघन है. बिल का विरोध करने वाले इसे शरिया कानून में सरकार का दखल बता रहे हैं. विरोधी बिल को महिलाओं के हक के खिलाफ बता रहे हैं. विरोधियों की ओर से कहा जा रहा है कि पुरुषों को सजा से महिलाओं को क्या मदद मिलेगी, गुजारा भत्ता कौन देगा? मांग हो रही है तलाकशुदा महिलाओं की मदद के लिए कानून बने.

👉 राज्यसभा में इस बिल का पास होना मुश्किल होगा क्योंकि सरकार के पास उतनी संख्या नहीं हैं.

👉 साथ ही वहां सरकार को समर्थन देनेवाले कुछ दल, जैसे बीजेडी और AIADMK का बिल पर समर्थन जुटाना सरकार के लिए मुश्किल लगता है.

👉 उस हालत में ये बिल संसदीय कमेटी के पास जाएगा और इसके शीतकालीन सत्र में पास होने की संभावना कम लगती है.

तीन तलाक के खिलाफ बिल पर आज लोकसभा में गरमागरम बहस हुई. बीजेपी की तरफ से केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर ने भी बहस में हिस्सा लिया. अकबर ने इस्लाम के नाम पर ठेकेदारी करने वालों को जमकर लताड़ा. उन्होंने कहा कि ये कानून तलाक के खिलाफ नहीं है ये कानून एक साथ तीन तलाक के खिलाफ है.

👉 अकबर ने कहा, ”मैं मुसलमान होने के नाते बोल रहा हूं. जहर फैलाया जा रहा है कि इस्लाम खतरे में हैं. मैं तो कहता हूं कि कुछ भी खतरे में नहीं बस कुछ मुसलमान मर्दों की जबरदस्ती खतरे में है. सच्चा मुसलमान कभी नहीं मानेगा कि इस्लाम खतरे में हैं. इसी नारे के आधार पर आजादी से पहले देश को बांटने की कोशिश हुई और अब समाज को बांटने की कोशिश हो रही है

उत्तर प्रदेश के रामपुर की गुल अफशां की तस्वीर आज संसद में कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने दिखाई और कहा कि वो तीन तलाक की सबसे ताजा शिकार हैं. उनको सुबह देर से उठने पर तीन तलाक दे दिया गया.

👉 कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद गुल अफशां तीन तलाक की सबसे ताजा पीड़ित हैं. उसका निकाह 6 महीने पहले ही रामपुर के सैदपुर इलाके में कासिम नाम के शख्स से हुआ था. शादी के बाद से ही कासिम उसे मारने पीटने लगा. सोमवार को भी दोनों में झगड़ा हुआ, कासिम ने गुलअफशां की बुरी तरह पिटाई की. रात भर वो दर्द से कराहती रही, सुबह जब उसकी आंख लग गई तो वो देर तक सोती रही, कासिम ने उसके देर से उठने पर ही उसे तलाक तलाक कह कर घर से निकाल दिया और खुद घर में ताला लगाकर भाग गया. पड़ोसियों ने जब पुलिस को जानकारी दी, तो पुलिस ने घर का ताला तोड़कर गुल अफशां को घर में घुसाया.

गुल अफशां का दर्द ये है कि उसने परिवार की मर्जी के खिलाफ कासिम से शादी की थी, परिवार तो पहले से ही दूर था अब शौहर ने भी तीन तलाक कह दिया है. गुल अफशां को अब भी उम्मीद है कि वो अपने पति को समझा लेगी. हालांकि अब तक गुल अफशां ने पुलिस में अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं कराई है.

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आज लोकसभा में तीन तलाक पर बिल पास होने से इस मुद्दे पर लंबे समय से बड़ी लड़ाई लड़ रहीं 👉 सायरा बानो खुश हैं. उन्हें जब तीन तलाक दिया गया था तो पीछे हटने या घुटने टेकने की बजाए वो अपनी लड़ाई को अदालत में ले गयीं. आज सायरा बानो वो आवाज है जिसने सिर्फ अपनी नहीं बल्कि सभी तीन तलाक पीड़ितों की लड़ाई लड़ी.

उत्तराखंड के काशीपुर की रहने वाली सायरा बानो ने अपने दर्द पर मरहम लगाने की जगह दर्द की वजह को खत्म करने की ठानी. सायरा अपनी लड़ाई को सुप्रीम कोर्ट तक लेकर गईं और तब तक लड़ती रहीं जब तक उन्हें जीत हासिल नहीं हुई.

सायरा काशीपुर के रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर इकबाल अहमद की बेटी हैं सोशल साइंस में मास्टर करने वाली सायरा की 16 साल पहले 2001 में इलाहाबाद के रिजवान से शादी हुई थी रिजवान पेशे से प्रॉपर्टी डीलर है. शादी के चंद रोज बाद ही सायरा पर दहेज के नाम पर अत्याचार होने लगे और फिर शादी के 14 साल बाद स्पीड पोस्ट से तीन तलाक भेज दिया गया. सायरा ने तीन तलाक से आजादी की पहल की और देश की न्याय व्यवस्था ने उसका साथ दिया. अब देश की संसद में भी सायरा की आवाज की गूंज सुनाई दे रही है.

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