Home देश महाराष्ट्र में जातीय हिंसा पर राजनीति शुरू दलितों को लेकर राहुल गाँधी ने बीजेपी RSS पर हमला बोला

महाराष्ट्र में जातीय हिंसा पर राजनीति शुरू दलितों को लेकर राहुल गाँधी ने बीजेपी RSS पर हमला बोला

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नए साल के मौके पर पुणे के कोरेगांव भीमा गांव में शौर्य दिवस मनाया गया जिसके बाद से दो समुदायों के बीच झड़प हुई. इसमें एक शख्स की मौत भी हो गई. अब जातीय हिंसा का असर महाराष्ट्र के अन्य इलाकों में हो रहा है.

इस पूरे हंगामे की वजह पुणे के पास भीमा कोरेगांव में हुआ दलित संगठनों का एक कार्यक्रम है. भीमा कोरेगांव में कल लाखों की संख्या में दलित 200 साल पुरानी एक लड़ाई की जीत का जश्न मनाने इकट्ठा हुए थे. सन 1818 में हुई लड़ाई में अंग्रेजों की सेना में शामिल दलितों ने पेशवा बाजीराव द्वितीय को हराया था. कोरेगांव भीमा में इस जीत का विजय स्तंभ बनाया गया. 1927 से हर साल 1 जनवरी को दलित इसे शौर्य दिवस की तरह मनाते आ रहे हैं. कल इसी कार्यक्रम के लिए जा रहे दलितों की कुछ हिंदू संगठनों के साथ झड़प हुई, जिसमें एक युवक की मौत हो गई, जिसके बाद वहां जबरदस्त हिंसा हुई.पुणे से करीब 30 किलोमीटर दूर पुणे-अहमदनगर हाइवे पर हुई इस हिंसा में 25 से ज्यादा गाड़ियां जला दी गईं, एटीएम और आसपास की दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया. पुणे में हुई हिंसा के बाद कई जिलों में दलित संगठन सड़कों पर उतर आए. जिसका सबसे ज्यादा असर मुंबई ईस्टर्न हाइवे पर देखने को मिला. मुंबई ईस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे के अलावा घाटकोपर और चेंबूर में दलितों ने हिंसक प्रदर्शन किया.

मुंबई से ठाणे और नासिक जाने के रास्ते पर जाम लगाया. कुर्ला के आगे हार्बर लोकल लाइन को बंद किया. चेंबूर में दलितों के प्रदर्शन के कारण मुंबई पुणे एक्सप्रेस वे तक जाना मुश्किल हो गया. कामराज नगर में रास्ता रोका गया और टायर जलाए गए. इसके अलावा ठाणे, औरंगाबाद, अहमदनगर, अकोला, परभणी, धुले, शिर्डी और अहमदनगर में भी प्रदर्शन और पथराव हुआ.

यही नहीं पुणे की घटना के विरोध में 8 दलित संगठनों ने कल महाराष्ट्र बंद का एलान किया है. महाराष्ट्र सरकार ने पूरी घटना की न्यायिक जांच का एलान कर दिया है, वहीं मृतक के परिवार को 10 लाख रुपए देने की बात भी कही गई है. इस मामले में दो हिंदू संगठनों शिव प्रतिष्ठान और समस्त हिंदू मोर्चा पर दंगा भड़काने का केस दर्ज किया गया है. फिलहाल आज के हंगामे को देखते हुए मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में सुरक्षा के और कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं.

महाराष्ट्र में हिंसा की शुरुआत भले कल हुई लेकिन इसके बीज 29 दिसंबर को पड़ चुके थे. पुणे के पास वडू गांव में शिवाजी के बेटे संभाजी की समाधि है और उनका अंतिम संस्कार करने वाले गोविंद महाराज की भी समाधि यहीं पर है. गोविंद महाराज की समाधि पर तोड़फोड़ से विवाद शुरू हुआ. हमले का आरोप मिलिंद एकबोटे के संगठन हिंदू एकता मोर्चा पर लगा. वडू गांव में उस दिन कोई हिंसा नहीं हुई, लेकिन बहस के बाद FIR दर्ज करायी गई. हिंदू एकता मोर्चा के कार्यकर्ताओं समेत 49 लोगों पर दलित उत्पीड़न एक्ट का केस दर्ज हुआ.

संगठन के प्रमुख मिलिंद एकबोटे पर केस नहीं हुआ. 29 से 31 दिसंबर तक वडू गांव में शांति बनी रही. आरोप है कि एफआईआर से नाराज मिलिंद एकबोटे के संगठन के लोगों ने भीमा कोरेगांव में दलितों के कार्यक्रम में हमला किया. आज हिंदू मोर्चा के हमले के खिलाफ महाराष्ट्र में दलितों ने जगह जगह हिंसक प्रदर्शन किए.

महाराष्ट्र के अलग अलग शहरो में दलितों का ये हंगामा बीजेपी के लिए खतरे की घंटी बन सकता है. महाराष्ट्र में दलितों की संख्या 1 करोड़ 33 लाख है, ये महाराष्ट्र की कुल आबादी का करीब 12 फीसदी है. राज्य 48 लोकसभा सीटों में से 18 सीट पर दलितों का प्रभाव है. मुंबई की 6 सीट, मराठवाड़ा की 8 सीट, पश्चिम महाराष्ट्र की 2 और विदर्भ की 2 सीटों पर औसतन 16 फीसदी दलित वोटर हैं.

राहुल गांधी ने एक बार फिर इस घटना के बहाने बीजेपी पर निशाना साधा है. राहुल ने ट्विटर पर लिखा, ”बीजेपी-आरएसएस की फासीवादी सोच है कि दलित हमारे समाज के सबसे निचले पायदान पर ही रहें. उना, रोहित वेमुला और भीमा-कोरेगांव की घटनाएं इसी तरह की सोच के खिलाफ आवाज है.”

दलितों के मुद्दे पर एक तरफ विरोधी सरकार को निशाना बना रहे हैं तो सरकार में मंत्री और दलितों की राजनीति करने वाले रामदास आठवले भी कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. बीजेपी के लिए चिंता की बात ये है कि महाराष्ट्र में मराठा पहले ही उससे नाराज माने जाते हैं, ऐसे में दलित दूर हुए तो गुजरात की तरह महाराष्ट्र में भी बीजेपी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

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