Home देश पुणे हिंसा :दलित नेता जिग्नेश मेवाणी और JNU छात्र उमर खालिद पर FIR भड़काऊ भाषण का आरोप Lokmat Live

पुणे हिंसा :दलित नेता जिग्नेश मेवाणी और JNU छात्र उमर खालिद पर FIR भड़काऊ भाषण का आरोप Lokmat Live

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पुणे के कोरेगांव भीमा में एक जनवरी को भड़की हिसा के पीछे साजिश के आरोप में पुणे पुलिस ने अब गुजरात के विधायक और दलित नेता जिग्नेश मेवाणी और जेएनयू के छात्र उमर खालिद को आरोपी बनाते हुए एक FIR दर्ज़ की है. दोनों पर भड़काऊ भाषण का आरोप है.

पुणे के विश्रामबाग थाने में दर्ज इस एफआईआर कॉपी के मुताबिक एक जनवरी की हिंसा भड़कने के पीछे 31 जनवरी को दिया गया भड़काऊ भाषण था. इसमें पहले आरोपी हैं उमर खालिद तो दूसरे आरोपी का नाम जिग्नेश मेवाणी है. उमर खालिद देशद्रोह के आरोप में जेल भी जा चुके हैं तो जिग्नेश मेवाणी हाल ही में गुजरात विधानसभा चुनाव में निर्दलीय चुनाव जीतकर विधायक बने हैं. एफआईआर के मुताबिक दोनों युवा नेताओं ने पुणे के ही शनिवारवाडा में आयोजित एक कार्यक्रम में भड़काऊ भाषण दिया. जिसके अगले ही दिन भीमा कोरेगांव में उसकी प्रतिक्रिया दिखी, जबरदस्त हिंसा हुई.

एफआईआर की कॉपी में भी दोनों नेताओं के भड़काऊ अल्फाज दर्ज हैं. उमर खालिद ने कहा, ”हम भीमा कोरेगांव की लड़ाई को आने वाला कल बना सकते हैं, उन्होंने हमला किया अब पलटवार की बारी है. नव पेशवाई का खात्मा ही भीमा कोरेगांव के शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी.” जिग्नेश मेवाणी ने 31 दिसंबर के कार्यक्रम में कहा, ”कार्यक्रम में जिग्नेश मेवाणी ने कहा कि नव पेशवाई के सामने अगर जीतना है तो भीमा कोरेगांव की लड़ाई को आगे लेकर जाना होगा. जाति निर्मूलन सड़कों पर लड़ाई से होगा, एक वर्ग का दूसरे वर्ग पर शासन सड़कों की लड़ाई से ही खत्म होगा.” एफआईआर दर्ज होते ही उमर खालिद और जिग्नेश मेवाणी के दूसरे कार्यक्रमों पर भी रोक लगा दी गई है. जिसमें मुंबई में होने वाला एक कार्यक्रम भी शामिल है.कार्यक्रम छात्र भारती विद्यार्थी संगठन का था. पुलिस ने इलाके में धारा 144 लगाकर कार्यक्रम को इजाजत नहीं दी. कार्यक्रम के लिए इजाजत लेने और नहीं लेने को लेकर भी विवाद हुआ लेकिन इसके बाद तो पुलिस की ही सिरदर्दी बढ़ गई. गाने-बजाने के साथ सड़क जाम कर दिया गया, दोनों युवा नेता के समर्थक जमीन पर लेट गए.

पुणे के भीमा कोरेगांव में साल के पहले दिन दलितों पर जो हमला हुआ और उसके बाद हुई हिंसा के मामले में, जिन दो लोगों पर केस दर्ज किया वो हैं: हिंदू एकता मोर्चा चलाने वाले, मिलिंद एकबोटे और शिव प्रतिष्ठान संस्था के संभाजी भिड़े. इनमें से आरोपी भिड़े, 85 साल के हैं और उनका इतिहास काफी दिलचस्प है.

महाराष्ट्र के सांगली गांव में इन्हें हर कोई गुरुजी के नाम से जानता है लेकिन इनकी असली शख्सियत का अंदाजा आपको तब होगा जब आपको पता चलेगा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन्हों गुरू जी कहते हैं. गुरु संभाजी भिड़े पर पुणे के पिंपरी पुलिस स्टेशन में केस दर्ज हो चुका है, तब से संभाजी कहां है किसी को पता नहीं लेकिन उनके संगठन शिव प्रतिष्ठान के लोग गुरुजी पर लगे आरोपों को गलत बता रहे हैं.

संभाजी भिड़े का असली नाम मनोहर है, उन्होने एटॉमिक साइंस में एमएससी की हुई है. वे पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज में प्रोफेसर रह चुके हैं. इस सब के बाद 1984 में उन्होने शिव प्रतिष्ठान नाम का संगठन बनाया, जिसका मकसद था शिवाजी महाराज के विचारों को फैलाना है. खुद संभाजी भिड़े का रहन सहन और अंदाज बिलकुल अलग है. नंगे पैर रहने वाले संभाजी इस उम्र में भी घूमघूम कर लोगों से मिलते रहते हैं. वो कभी कार में नहीं चले, आज भी वो साइकिल या बस से ही अपनी यात्राएं करते हैं. बड़ी संख्या में युवा उन्हें अपना आदर्श मानते हैं, वो जहां जाते हैं उनके इर्द गिर्द युवाओं की भीड़ लग जाती है, कहा जाता है कि उनके एक इशारे पर 4 से 5 लाख युवा एक जगह जमा हो सकते हैं. यही संभाजी की ताकत मानी जाती है.

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वो साल 2009 में तब चर्चा में आए जब उनके समर्थकों ने जोधा-अकबर फिल्म के विरोध के नाम पर सांगली, सतारा और कोल्हापुर में जमकर उत्पात किया. उसी साल तब उन्होने जमकर हंगामा किया जब सांगली के एक गणेश पंडाल में शिवाजी महाराज का एक चित्र लगाने से रोका गया. संभाजी के संगठन के 2 कार्यकर्ता रोज रायगढ़ किले में शिवाजी की पूजा के लिए जाते हैं. उन्होने रायगढ़ क़िले में सोने का सिंहासन बनाने का संकल्प किया है जिसमें करीब 144 किलोग्राम सोना इस्तेमाल होगा.

पुणे के वडू गांव के लोग ही नहीं बल्कि भीमा कोरेगांव की पंचायत और दलित संगठनों ने भी शांति की अपील की है. कोरेगांव की पंचायत ने पत्र लिखकर कहा है कि दलित जिस विजय स्तंभ को मानते हैं वहां होने वाले किसी कार्यक्रम से उनका कोई विरोध नहीं है, वहीं कोरेगांव के दलित संगठनों की तरफ से लिखे गए पत्र में कहा गया है कि कुछ बाहरी लोगों ने गांव का नाम खराब करने की कोशिश की है जिसे कामयाब नहीं होने दिया जाएगा.

विपक्ष के विरोध के चलते अब तीन तलाक बिल ठंडे बस्ते में जाता लगता है. मौजूदा सत्र में इसके पास होने की उम्मीद खत्म हो गई. विपक्ष की तरफ से इस बिल को सलेक्ट कमेटी भेजने की मांग पर हंगामे के बाद आज सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी और कल सत्र का आखिरी दिन है.

मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक के अभिशाप से बचाने के लिए पेश हुआ बिल राजनीति का शिकार दिख रहा है. बिल पर विपक्ष को भरोसे में लेकर सरकार को रास्ता निकालने की कोशिश करनी होगी लेकिन ये कोशिश भी अब अगले संसदीय सत्र में ही मुमकिन हो पाएगी.

तीन तलाक बिल के मुद्दे पर बीजेपी की स्थिति इतनी मजबूत है कि उसके दोनों हाथ में लड्डू है. यानी बिल पास हो जाए तो बीजेपी के लिए बड़ी बात होगी जिससे ना सिर्फ बीजेपी समर्थक बल्कि मुस्लिम महिलाएं भी खुश होंगी. और विपक्ष बिल अटका तो बीजेपी को मुस्लिम महिला विरोधी करार देगी.

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