Home बिहार बिहार को बड़ी सौगात, अब बिहार से भी निकलेंगे धोनी,विराट और पांड्या

बिहार को बड़ी सौगात, अब बिहार से भी निकलेंगे धोनी,विराट और पांड्या

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बिहार के क्रिकेट प्रेमियों और क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए खुशखबरी है। चौदह साल ‘ वनवास ‘ काट कर बिहार लौटा क्रिकेट। अब बिहार से भी निकलेंगे तेंदुलकर, विराट, धोनी, रोहित और पांड्या।

एक पूरी पीढ़ी क्रिकेट को सिर्फ टेलीविजन पर देखती रही। हुनर था मगर चाहकर भी वे देश का सबसे बड़ा घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंट नहीं खेल सकते थे। दस साल आपसी खींचतान और सात वर्ष तक कोर्ट में लड़ाई के बाद 2018 बिहार क्रिकेट के लिए नया सवेरा लेकर आया है। डेढ़ दशक बाद बिहार क्रिकेट आजाद हुआ है। कई खिलाड़ियों ने समय से पहले सन्यास ले लिया तो कई बंगाल, झारखंड और दिल्ली चले गए। अब वक्त ने करवट ली है। बिहार फिर से रणजी खेलेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार क्रिकेट एसोसिएशन को रणजी ट्रॉफी व अन्य टूर्नामेंट में खेलने की इजाजत दे दी है। 14 साल बाद बिहार के क्रिकेट खिलाड़ी राष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग ले सकेंगे। अब रणजी के लिए उन्हें झारखंड का मुंह नहीं ताकना होगा बल्कि वे अपने राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगे। यहां के क्रिकेटरों में भी उम्मीद जगी है कि वे टीम इंडिया में खेल सकते हैं। यहां के भी खिलाड़ी विराट कोहली , रोहित शर्मा और हार्दिक पांड्या की जगह ले सकते हैं।

ये आदेश गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार के सचिव आदित्य वर्मा की ओर से दाख़िल याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए। पीठ को बताया गया कि देश का तीसरे नम्बर के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य बिहार के साथ पक्षपाती रवैया है।

आगे बताया गया कि यह राज्य रणजी और अन्य राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट में भाग नही ले पाता। यह जानकारी होने के बाद पीठ ने कहा कि अंतरिम तौर पर बिहार क्रिकेट एसोसिएशन ( बीसीए ) रणजी और अन्य टूर्नामेंट में भाग ले सकती है। कोर्ट ने कहा कि उसके आदेश के आधार पर चुनी गई बीसीए इस सबकी अध्यक्षता करेगी।

2000 में झारखंड के विभाजन के बाद लगा था क्रिकेट पर ग्रहण

वर्ष 2000 में झारखंड विभाजन के बाद बिहार क्रिकेट पर ग्रहण लगना शुरू हो गया।2001 में क्रिकेट जहां झारखंड चला गया, वहीं यहां खेल के लिए लड़ाई शुरू हो गई। शुरू में बीसीए के समानांतर एसोसिएशन ऑफ बिहार क्रिकेट ( एबीसी ) बना फिर उनके बीच खींचतान शुरू हो गई। इस दौरान भविष्य अंधकारमय होता देख खिलाड़ियों ने बिहार प्लेयर्स एसोसिएशन बनाकर बीसीसीआई से दो-दो हाथ करने की ठानी।

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