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माँ वैष्णो देवी के दर्शन के लिए एक और वैकल्पिक मार्ग

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मां वैष्णो देवी के दर्शन के लिए मार्च-अप्रैल में श्रद्धालुओं के लिए नया मार्ग खोलने की तैयारी है। मार्ग पर लगाए जा रहे मॉड्यूलर शेड, हर किलोमीटर पर पांच करोड़ रुपये होंगे खर्च। और इसके साथ ही सुरक्षा के पूरे प्रबंध किए जा रहे हैं।

श्री माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए इसी वर्ष एक और वैकल्पिक मार्ग खुलने जा रहा है। नया ताराकोटा-आदकुंवारी मार्ग अप्रैल में खुलने की संभावना है। यह पुराने मार्ग से थोड़ा लंबा होगा, लेकिन मार्ग पर सुरक्षा के पूरे प्रबंध किए जा रहे हैं। इस समय बाणगंगा से आदकुंवारी तक करीब छह किलोमीटर का रास्ता है। इसमें श्रद्धालुओं के अलावा घोड़े-खच्चर भी चलते हैं। मगर नया मार्ग 7.4 किलोमीटर लंबा है। यह मार्ग कटड़ा से सटे बालनी से शुरू होगा और आदकुंवारी में बने दूसरे मार्ग से जुड़ जाएगा।

इसका लिंक बाणगंगा के साथ भी किया जा रहा है। इस मार्ग पर केवल श्रद्धालु पैदल ही यात्रा कर सकेंगे। घोड़े-खच्चरों को चलने की अनुमति नहीं होगी। यात्रा मार्ग पर कई जगह भूस्खलन के कारण श्रद्धालुओं के घायल होने और कुछ की मौत भी हो जाती है। नए मार्ग पर इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नए मार्ग पर मॉड्यूलर शेड बनाए जा रहे हैं।

एक किलोमीटर पर यह शेड बनाने पर पांच करोड़ रुपये खर्च आ रहा है। इस शेड पर अगर कोई पत्थर गिरता है तो वे इसे तोड़ नहीं सकता है। इसकी छत पर विशेष रूप से स्प्रिंग लगे होंगे जो पत्थर को श्रद्धालुओं पर गिरने नहीं देंगे। पूरे मार्ग को खूबसूरत बनाया जा रहा है। इसमें शेड के भीतर ही रोशनी की व्यवस्था की जा रही है। बाहर मार्ग पर बल्ब लगाने के लिए अलग से पोल नहीं लगाए जाएंगे।

पुराने दोनों मार्गों की तर्ज पर इसमें भी संगीत की व्यवस्था होगी, जिसमें चौबीस घंटे भजनों के अलावा श्रद्धालुओं को जरूरी सूचनाएं दी जाएंगी। मगर नए मार्ग पर स्पीकर मॉड्यूलर शेड के भीतर ही होंगे। पुराने मार्ग पर स्पीकर लगाने के लिए अलग से पोल लगाए गए हैं।

श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के एडिशनल सीईओ का कहना है कि नए मार्ग पर श्रद्घालुओं के लिए सभी सुविधाओं का ध्यान रखा गया है। मार्ग पर टाइल भी लगाई गई है, जिसमें बुजुर्ग आराम के साथ चल सकेंगे। भोजनालय, पेयजल, कॉफी कॉर्नर और स्वास्थ्य सुविधा के लिए अलग से एक प्राथमिक चिकित्सा केंद्र होगा। बोर्ड का पूरा प्रयास है कि इसे इसी साल मार्च-अप्रैल में श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाए।

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