Home लोकमत स्पेशल हिंदी है दुनिया के माथे की बिंदी, इसलिए 10 जनवरी को मनाया जाता है विश्व हिंदी दिवस

हिंदी है दुनिया के माथे की बिंदी, इसलिए 10 जनवरी को मनाया जाता है विश्व हिंदी दिवस

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देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली हिंदी को 14 सितंबर, 1949 में भारतीय संविधान में देश की राजभाषा का दर्जा दिया गया। 33 करोड़ लोग हैं दुनिया में जिनकी हिंदी है प्रथम भाषा। दुनिया में कुल हिंदी भाषी लोगों की संख्या 54.4 करोड़ है।

भारत की राजभाषा हिंदी दुनिया को अपने आँचल में समेट रही है। दुनियाभर में हिंदी बोलने और समझने वाले लोगों की तादाद बढ़ने के साथ ही हिंदी का क्रेज भी पूरी दुनिया में फैल रहा है। देश की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत को सहेज-समेटकर रखने वाली हिंदी विश्व के माथे पर बिंदी की तरह चमक रही है।

सिंधु से बना हिंदी

हिंदी शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द सिंधु से हुई। हिंदी के व्याकरण और शब्दों का आधार संस्कृत है। हिंदी का इतिहास लगभग एक हजार वर्ष पुराना माना जाता है। संस्कृत का अपभ्रंश स्वरूप हिंदी का पहला स्वरूप कहा जाता है।

दुनिया में हिंदी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भारत सरकार ने दस जनवरी, 1975 को पहला विश्व हिंदी सम्मेलन नागपुर में आयोजित किया। इसमें 30 देशों से 122 प्रतिनिधि शामिल हुए। देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस सम्मेलन की वर्षगांठ मनाने के लिए 2006 से हर साल दस जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। 1975 से अब तक मॉरिशस, ब्रिटेन, अमेरिका, द. अफ्रीका समेत कई अन्य देशों में यह सम्मेलन आयोजित किया गया है।

मिला राजभाषा का दर्जा

देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली हिंदी को 14 सितंबर, 1949 में भारतीय संविधान में देश की राजभाषा का दर्जा दिया गया।

इसलिए 10 जनवरी को मनाया जाता है विश्व हिंदी दिवस

हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य विश्व में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए जागरूकता पैदा करना तथा हिंदी को अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में पेश करना है। इस दिन विदेशों में भारत के दूतावास में विशेष कार्यक्रम होते हैं। हिंदी सलाहकार समिति और विश्व हिंदी सम्मेलन के संचालन समिति के सदस्य वीरेंद्र कुमार यादव बताते हैं कि पहला विश्व हिंदी सम्मेलन 10 जनवरी को नागपुर में आयोजित हुआ था।

महात्मा गांधी भी दक्षिण अफ्रीका से 10 जनवरी को ही वापस आये थे। इसके अलावा सात से नौ जनवरी तक प्रवासी भारतीय दिवस भी मनाया जाता है। इसी सिलसिले को जारी रखने के लिए ठीक इसके अगले दिन 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाए जाने का प्रस्ताव 2005 में रखा गया जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद 2006 से हर साल विश्व हिंदी दिवस मनाया जाने लगा। अब देश में भी यह दिवस मनाया जाने लगा है।

ऐसे दौर में जब कई बार अपने देश में हिंदी को लेकर चिंता जताई जाती है, उसी दौर में अपनी हिंदी सात समंदर पार मुस्कुरा रही है। विदेश गए भारतवंशियों ने देश तो छोड़ दिया मगर भाषा नहीं छोड़ पाए। वे जहां हैं, वहीं अपनी भाषा को समृद्ध बनाने में लगे हैं। कोई सिंगापुर में हिंदी में कवि गोष्ठी करवा रहा तो कोई अफ्रीका-ऑस्ट्रेलिया में हिंदी को बढ़ा रहा है।

दुनिया में जमाई धाक

पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों में तो हिंदी प्रमुख भाषाओं में शुमार है। 1997 में फिजी ने इसे अपनी आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया । अमेरिका, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, त्रिनिदाद व टोबैगो, गुयाना, दक्षिण अफ्रीका, सूरीनाम और मॉरीशस में भी हिंदी बोलने वाले लोगों की तादाद बढ़ती जा रही है। दुनिया के 150 से अधिक विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जाती है। अमेरिका में अंग्रेजी के इतर बोली जानी वाली भाषाओं में हिंदी दूसरी सर्वाधिक लोकप्रिय भाषा है। ब्रिटेन की लंदन, कैम्ब्रिज और न्यू यॉर्क यूनिवर्सिटी में हिंदी पढ़ाई जाती है। चीन में 1942 में हिंदी अध्ययन शुरू। 1957 में हिंदी रचनाओं का चीनी में अनुवाद कार्य आरंभ हुआ।

इंटरनेट पर हिंदी का बोलबाला

हिंदी जानने, समझने और बोलने वालों की बढ़ती संख्या के चलते अब दुनियाभर की वेबसाइटों भी हिंदी को प्राथमिकता दे रही हैं। ई-मेल, ई-कॉमर्स, एसएमएस एवं अन्य इंटरनेट सेवाओं के इस्तेमाल के लिए हिंदी भाषा को भी प्रमुख विकल्प बनाया गया है। माइक्रोसॉफ्ट, गूगल व आईबीएम जैसी विश्वस्तरीय कंपनियां व्यापक बाजार और भारी मुनाफे के लिए हिंदी को बढ़ावा दे रही हैं।

इस साल मॉरीशस में आयोजित होगा विश्व हिंदी सम्मेलन

हिंदी को विश्व स्तर पर प्रचारित-प्रसारित करने के लिए हर तीसरे वर्ष विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया जाता है। यह हिंदी भाषा का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है, जिसमें विश्व भर से हिंदी विद्वान, साहित्यकार, पत्रकार, भाषा विज्ञानी, विषय विशेषज्ञ तथा हिंदी प्रेमी जुटते हैं। अब तक दस विश्व हिंदी सम्मेलन हो चुके हैं। 2015 में 10वां विश्व हिंदी सम्मेलन भोपाल में हुआ था। इस साल मॉरीशस में विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन होगा। सम्मेलन में न केवल साहित्य बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी हिंदी की स्थिति व प्रगति को लेकर भी चर्चा होती है।

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