Home बिहार ‘समृद्ध बिहार,गौरवशाली बिहार में युवाओं की भूमिका’ विषय पर पटना में नीतीश कुमार का मेगा इवेंट

‘समृद्ध बिहार,गौरवशाली बिहार में युवाओं की भूमिका’ विषय पर पटना में नीतीश कुमार का मेगा इवेंट

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आगामी 20 मार्च 2018 दिन मंगलवार को पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में ‘समृद्ध बिहार, गौरवशाली बिहार में युवाओं की भूमिका’ विषय पर माननीय मुख्यमंत्री श्री नितीश कुमार के साथ साथ कई बड़े नेता, बुद्धिजीवी एवं विद्वान अपने बहुमूल्य विचार रखेंगे। युवा इस कार्यक्रम में सादर आमंत्रित हैं।

दोस्तों, जब हम समृद्ध बिहार, गौरवशाली बिहार की बात करते हैं तो हम हजारों साल पहले के अपने अतीत को देखते हैं। हमारा अतीत हमारी ताकत है जो हमें बेहतर वर्तमान और भविष्य बनाने की ताकत देता है। हमारा गौरवशाली अतीत हमें प्रेरणा देता है और गलतियों को न दोहराने के लिए सचेत भी करता है। आज बिहारी समाज को इतिहास बोध की जरूरत है। अगर कोई कहता है कि बिहार के इतिहास के बिना भारतवर्ष का इतिहास अधूरा है तो इसके पीछे अकाट्य तर्क भी मौजूद है।

लंबे समय तक भारत के इतिहास की धुरी बिहार रहा है और साथ ही सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्रबिंदु भी। धार्मिक मान्यताओं की माने तो जगतजननी माता सीता इसी धरती पर जन्म लीं और मगध सम्राट जरासंध ने अपनी विजयपताका यहीं से शासन करते फैलायी। महात्मा बुद्ध के काल से यदि शुरू करें तो उस समय हर्यक वंश के राजा बिम्बिसार का शासन था। उनके पुत्र अजातशत्रु ने भारतवर्ष के बड़े भूभाग पर अपना आधिपत्य स्थापित किया। उसके बाद नंद वंश और फिर मौर्यवंश के शासन के दौरान बिहार समूचे भारतवर्ष के शासन का केंद्रबिंदु बना रहा। गुप्त वंश के शासन के दौरान बिहार बेहद समृद्ध बना।

अगर एक पंक्ति में कहा जाए कि दरअसल बिहार का इतिहास ही भारत का इतिहास है तो कहीं से गलत नही होगा। इसी तरह उत्तर वैदिक काल में जाएं तो वैदिक साहित्य, महाकाव्य, ब्राह्मण ग्रंथ, उपनिषद आदि की रचनाएं बिहार में ही हुई है। मिथिला के राजा का दरबार पूरे भारत के सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र था। यह भी कहा जाता है कि मिथिला के अंतिम राजा के समय में ही लोकतंत्र की स्थापना हुई थी जो दुनिया की सबसे पहली गणतांत्रिक शासन पद्वति थी।

इसी इतिहास में जाने पर जब हमें अपने गौरवशाली अतीत की जानकारी मिलती है तो हमें इससे प्रेरणा मिलती है। हमारी शिक्षा पद्वति आज से सैकड़ों साल पहले कितनी समृद्ध थी इसका पता नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालयों के भग्नावशेष से पता चलता है। जहाँ देश विदेश के हजारों छात्र धर्म, दर्शन और विज्ञान आदि विषयों की शिक्षा प्राप्त करते थे। इन संस्थानों के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल करने के बाद ही पता चलता है कि हमारे पूर्वजों ने कितना अथक परिश्रम किया होगा। ये इतिहास का एक प्रेरणादायक प्रसंग है जो हमें हमेशा कुछ बेहतर करने की प्रेरणा देता है।

आदरणीय मुख्यमंत्री नितीश कुमार जी ने हमारे राज्य के ऐतिहासिक धरोहरों को एक नयी पहचान देने की कोशिश की है। नालंदा विश्वविद्यालय की पुनर्स्थापना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पटना में बिहार संग्रहालय का निर्माण ही इसीलिए किया गया ताकि पूरी दुनिया बिहार के ऐतिहासिक धरोहरों के बारे में जानकारी प्राप्त करे। मुख्यमंत्री जी इस बारे में कितना गंभीर है इसका पता इसी बात से चलता है कि उन्होंने बिहार की भूमि पर जन्मे सिख धर्मगुरु गुरुगोविंद सिंह जी की साढ़े तीन सौवीं जयंती पर दुनिया भर के सिख धर्मावलंबियों को बिहार के बेहतरीन आतिथ्य सत्कार से परिचित कराया। महात्मा गाँधी के प्रथम सत्याग्रह आंदोलन के सौ साल पूरा होने पर स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान का ऐतिहासिक क्षण भला कौन भूल सकता है। बिहार के समृद्ध और गौरवशाली अतीत से परिचित कराने के लिए ही रामायण सर्किट, बुद्धा सर्किट का काम हो रहा है। पटना में बुद्ध पार्क का निर्माण और बोधगया, वैशाली में पर्यटन सुविधाओं का लगातार विस्तार ये बताता है कि मुख्यमंत्री जी राज्य के समृद्ध और गौरवशाली अतीत के पुनर्स्थापना को लेकर कितने सजग हैं।

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