Home राजनीति भाजपा ने बनाई ऐसी रणनीति, 2019 के चुनाव में अकेले आएंगी 300 से अधिक सीटें

भाजपा ने बनाई ऐसी रणनीति, 2019 के चुनाव में अकेले आएंगी 300 से अधिक सीटें

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कांग्रेस को बड़ा झटका देने की तैयारी में भाजपा, अमित शाह का फॉर्मूला एक बूथ पर दस यूथ का फॉर्मूला पूरे देश में लागू करने की है तैयारी, वरिष्ठ नेताओं व मंत्रियों को पांच सीटों की दी गई जिम्मेदारी, केरल व पश्चिम बंगाल पर भाजपा की विशेष नजर, परंपरागत तरीके से वोटरों को साधने पर जोर.

भाजपा अध्यक्ष ने पार्टी के जीत की बनाई है रणानीति.

भारतीय जनता पार्टी ने ऐसी रणनीति बनाई है कि 2019 में पार्टी को 300 से अधिक सीटें आएंगी। पार्टी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में 282 सीटें जीती थीं। हालांकि, उप चुनावों में आठ सीटों को बचाने में पार्टी नाकामयाब साबित रही। भाजपा ने अपने जीते हुए सीटों पर जन प्रतिनिधियों की सक्रियता बढ़ेगी। वहीं, भाजपा की नजर उन 90 सीटों है, जहां 2014 के लोकसभा चुनाव में दूसरे स्थान पर रही थी। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपने पके-पकाए फॉर्मूले एक बूथ पर दस यूथ को पूरे देश में लागू करने का निर्णय लिया है। सहयोगी दलों को टिकट मिलने के बाद भी बूथ स्तरीय कार्यकर्ता एनडीए के सहयोगी दल के उम्मीदवार को जिताने की मुहिम जुटेंगे। भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में अपने दम पर 300 से अधिक सीटों पर जीत का लक्ष्य रखा है। पश्चिम बंगाल व केरल में भगवा लहराने की तैयारी पूरे जोरों पर है।

आम लोगों के बीच जाकर वोट मांगने की प्रणाली को ही आगे बढ़ाने की है भाजपा अध्यक्ष की योजना.

भारतीय जनता पार्टी ने अपनी मुहिम को अमली जामा पहनाने के लिए 20 केंद्रीय मंत्रियों व वरिष्ठ नेताओं को कमान सौंपी गई है। हरेक के जिम्मे पांच-पांच लोकसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें रविशंकर प्रसाद, जय प्रकाश नड्‌डा, धर्मेंद्र प्रधान, प्रकाश जावड़ेकर, मनोज सिन्हा, नरेंद्र सिंह तोमर, पीपी चौधरी, गजेंद्र सिंह शेखावत आदि प्रमुख हैं। उन्हें अपनी रणनीति के दम पर पार्टी को दूसरे स्थान से पहले स्थान पर लाने की तरकीब निकालनी होगी। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी चुनावी माहौल में ढल गए हैं। उनका राज्यों का दौरा शुरू हो चुका है। अमित शाह ने अप्रैल से अलग-अलग राज्यों की 5-5 लोकसभा सीटों का दौरा करना शुरू किया है। अप्रैल के पहले सप्ताह में शाह ने ओडिशा की 5 लोकसभा सीटों का दौरा किया।

रायबरेली व अमेठी जैसी सीटों पर भी है अमित शाह की नजर.

ओडिशा दौरे के अमित शाह ने पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करने और बूथ प्रमुखों का सम्मेलन आयोजित करने पर जोर दिया। साथ ही, रोड शो के जरिए आम लोगों से संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया। शाह का मानना है कि परंपरागत तरीके से ही वोटरों के बीच पार्टी की पैठ को बढ़ाया जा सकता है। इसी को देखते हुए शाह ने 21 अप्रैल को उत्तर प्रदेश का दौरा किया। इस क्रम में उन्होंने सोनिया गांधी के परंपरागत निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली, राहुल गांधी के निर्वाचन क्षेत्र अमेठी समेत सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ सीटों के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। पार्टी कार्यकर्ताओं के एक सम्मेलन को भी संबोधित किया।

भाजपा की कोर कमेटी हारी हुई सीटों को जीतने की तैयार कर रही योजना

भाजपा अध्यक्ष मई के दूसरे सप्ताह में राजस्थान का दौरा करेंगे। राजस्थान में हाल ही में लोकसभा की दो सीटों के लिए हुए उपचुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। भाजपा के आधिकारिक सूत्रों की मानें तो पार्टी की निगाह उन 142 सीटों पर भी है, जहां आज तक उसका खाता नहीं खुला। ये सीटें पश्चिम बंगाल, ओडिशा, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों से हैं। हालांकि उनका कहना है कि इनमें से कुछ सीटों पर पार्टी की स्थिति पहले से बेहतर हुई है। केरल में भाजपा आज तक एक भी सीट नहीं जीती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) वहां लंबे समय से काम कर रहा है। उसको भरोसा है कि 2019 में भाजपा का केरल में भी खाता खुलेगा।

भाजपा दलित वोट को साधने के लिए बनाई है अलग प्रकार की रणनीति.

भाजपा ने जो योजना बनाई है उसके तहत उन दो करोड़ मतदाताओं को भी शामिल किया है, जिनका जन्म 2000 में हुआ है और वे 2019 में पहली बार वोट डालेंगे। भाजपा इसके तहत अपने हर बूथ-दस यूथ के फॉर्मूले को देश भर में लागू करेगी। भाजपा ने दलितों, आदिवासियों और ग्रामीण महिलाओं को पार्टी से जोड़ने के लिए ‘ग्राम स्वराज’ अभियान शुरू किया है। इसके तहत उन 21,058 गांवों का चुना गया है, जहां दलित अच्छी-खासी संख्या में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी सांसदों, विधायकों और नेताओं को इन गावों में दो-दो रातें गुजारने को कहा है। यह पूरी स्थिति कांग्रेस व पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए परेशानी बढ़ाने वाली होगी, क्योंकि जमीनी स्तर पर अभी तक पार्टी 2019 के चुनावी मोड में नहीं आ पाई है। जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने के लिए कांग्रेस के स्तर पर कोई खास प्रयास होता नहीं दिख रहा है। वहीं, भाजपा आरएसएस व अन्य संगठनों के माध्यम से समाज के हर तबके तक पहुंचने की योजना पर कार्य शुरू कर चुकी है।

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