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बिहार में चौथे मोर्चे की तैयारी !

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एनडीए और यूपीए के अलावा कुछ गैर भाजपा और गैर कांग्रेसी दल फेडरल फ्रंट नाम से तीसरे मोर्चे के गठन की तैयारी में लगे हैं, लेकिन साथ ही बिहार में एक चौथा मोर्चा भी बनता दिख रहा है।

तीसरे मोर्चे में तेलंगाना राष्ट्र समिति और तृणमूल कांग्रेस पहल कर रहे हैं जिसमें समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, जनता दल सेक्युलर, इंडियन नेशनल लोकदल, राष्ट्रीय लोकदल, बीजू जनता दल, डीएमके, तेलुगू देशम जैसे दल शामिल हो सकते हैं।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव लगातार इन दलों के नेताओं से मिलने में लगे हैं और करीब-करीब तय माना जा रहा है कि ये दल कांग्रेस और भाजपा से दूरी रखते हुए तीसरा मोर्चा बनाएंगे। बाद में इनका गठबंधन कांग्रेस से हो सकता है।

इस सबके बीच में बिहार में अजीब राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं। राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव को सजा होने के बाद से ही उनके बेटे तेजस्वी यादव ने बेहद आक्रामक रुख अपना लिया है और वो जनता दल यूनाइटेड तथा भारतीय जनता पार्टी दोनों के खिलाफ लगातार हमले कर रहे हैं।

राजद को इस आक्रामकता का लाभ भी मिलता दिख रहा है और माना जा रहा है कि उसकी लोकप्रियता में बढ़ोतरी ही हुई है। ऐसे में एनडीए में शामिल गैर भाजपा दल अपने को ज्यादा मुश्किल में पा रहे हैं।

रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी और उपेंद्र कुशवाहा का राष्ट्रीय समानता दल ही नहीं, नीतीश कुमार का जनता दल यूनाइटेड भी राजद की आक्रामकता का सामना नहीं कर पा रहा है। इन दलों को लगने लगा है कि भाजपा के साथ रहना अब उनके भविष्य के लिए खतरनाक हो सकता है।

इन दलों की आपसी बातचीत भी होने लगी है और माना जा रहा है कि ये दल भाजपा से दूरी दिखाने का प्रयास करते हुए अपनी ताकत बचाने की कोशिश करेंगे और ऐसे में एक चौथे मोर्चे का गठन हो सकता है।

जहां तीसरा मोर्चा कांग्रेस से अलग रहते हुए भी उसके ज्यादा करीब होगा, वहीं ये चौथा मोर्चा भाजपा से अलग तो होगा लेकिन उसका रवैया भाजपा के प्रति कुछ नर्म ही रहेगा।

चौथा मोर्चा बनाने के लिए रामविलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा को केंद्र में मंत्रिपद गंवाना पड़ सकता है, और इसी वजह से दोनों में थोड़ी हिचकिचाहट है। जनता दल यू को भी बिहार की सरकार बचानी है। अब ये तीनों दल कुछ ऐसा रास्ता निकालने में लगे हैं कि उनके मौजूदा स्तर पर भी फर्क न पड़े और भाजपा से उनकी दूरी भी जनता को दिखने लगे।

एक राह ये हो सकती है कि भाजपा को बिहार में सरकार से अलग कर दिया जाए और उससे बाहर से समर्थन देने को कहा जाए। केंद्र में पासवान और कुशवाहा मंत्रिपद छोड़ दें। इसमें दिक्कत यही है कि भाजपा शायद ही इस बात के लिए तैयार हो। बहरहाल, तीनों दल चौथा मोर्चा बनाने की जुगत में लग तो गए हैं।

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