Home देश राहुल गांधी बनना चाहते हैं प्रधानमंत्री, मार्ग में है ये बाधक जो तोड़ सकते हैं सपना

राहुल गांधी बनना चाहते हैं प्रधानमंत्री, मार्ग में है ये बाधक जो तोड़ सकते हैं सपना

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कहा- अगर 2019 में कांग्रेस सत्ता में आई तो क्यों नहीं बनूंगा प्रधानमंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार जाहिर की पीएम पद पर जाने की इच्छा, लेकिन राह में हैं बड़े कांटे.

राहुल गांधी ने सार्वजनिक रूप से पहली बार प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जाहिर कर दी। कर्नाटक विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान के दौरान मंगलवार को एक सवाल के जवाब में राहुल ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को बहुमत मिलती है तो क्यों नहीं प्रधानमंत्री बनूंगा? पांच महीने पहले कांग्रेस के 60वें अध्यक्ष बने राहुल गांधी ने पहली बार इस प्रकार की इच्छा जताई है। हालांकि, पार्टी की ओर से उनके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में प्रोजेक्ट किए जाने की लगातार चर्चा चलती रही है। हालांकि, उनके प्रधानमंत्री पद पर जाने के मार्ग में कई बाधाएं भी हैं।

2019 की लोकसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पद पर अपनी दावेदारी पेश कर दी है। अब तस्वीर साफ हो गई है, 2019 का लोकसभा चुनाव नरेंद्र मोदी वर्सेज राहुल गांधी होने जा रहा है। कर्नाटक में चुनाव प्रचार के दौरान एक सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि अगर कांग्रेस 2019 में सबसे बड़ी पार्टी बनी तो प्रधानमंत्री क्यों नहीं बनूंगा। हालांकि, यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि कांग्रेस का प्रदर्शन कैसा रहता है। वैसे कांग्रेस के भीतर राहुल गांधी को पीएम बनाने की मांग 2012 से उठ रही है। उस समय राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा था कि देश चाहता है कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनें। पार्टी स्वीकार कर चुकी है कि राहुल कभी भी प्रधानमंत्री का पद संभालें, प्रधानमंत्री खुद कह चुके हैं।

राहुल गांधी के सीएम बनने के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा पार्टी का जर्जर सांगठनिक ढांचा है। राहुल निर्बल पड़े कांग्रेस के ढांचे में जान फूंकने की कोशिश तो कर रहे हैं, लेकिन अधिकांश राज्यों में सत्ता से बाहर कांग्रेस को इसमें काफी परेशानी हो रही है। दूसरा सबसे बड़ा कारण स्थानीय राजनीतिक दल है। कांग्रेस ने 2014 से पहले सत्ता में बने रहने के लिए लगातार स्थानीय क्षत्रपों को स्थापित होने का मौका दिया। कांग्रेस चाहती थी कि पार्टी का विकल्प राष्ट्रीय स्तर पर न पनपे, इसलिए स्थानीय स्तर छोटे-छोटे दलों को बढ़ावा दिया जाए। इसका परिणाम यह हुआ कि ये स्थानीय दल कांग्रेस की जमीन पर पनपे, पले-बढ़े, फले-फूले और पार्टी की ही जमीन खत्म कर दी। इसका उदाहरण बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड जैसे राज्यों में देखा जा सकता है। उत्तर प्रदेश व बिहार में चाहे समाजवादी पार्टी हो, बहुजन समाज पार्टी को राजद हो या लोक जनशक्ति पार्टी, इन सभी ने कांग्रेस की जमीन पर अपनी राजनीति की पौध को विराट स्वरूप दिया है।

इनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा आएगी आड़े :

ममता बनर्जी

ममता बनर्जी कभी भी कांग्रेस को केंद्रीय भूमिका में नहीं देखना चाहती हैं। यही कारण है कि उन्होंने नरेंद्र मोदी के हर विरोधी से हाथ मिलाने की कोशिश की। फेडरल गठबंधन बनाने का प्रयास किया। राहुल गांधी की जगह वे खुद को पीएम पद पर देखना अधिक पसंद करेंगी।

मुलायम सिंह यादव

समाजवादी पार्टी पर भले ही अखिलेश यादव का कब्जा हो गया हो, लेकिन नेताजी के नाम से मशहूर मुलायम सिंह यादव का कद भारतीय राजनीति में काफी बड़ा है। कई मौकों पर मुलायम ने पीएम पद की इच्छा जताई है। अगर 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा की स्थिति अच्छी रही तो राहुल की जगह वे पीएम पद पर दावा कर सकते हैं।

मायावती

पीएम की कुर्सी पर एक दलित नेता क्यों नहीं? इस सवाल का जवाब अभी तक किसी के पास नहीं है। अगर यूपी में बसपा 2019 में वापसी करने में सफल हुई तो मायावती प्रधानमंत्री पद के लिए दावा ठोंक सकती हैं।

नीतीश कुमार

बिहार के सीएम नीतीश कुमार भी प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जता चुके हैं। हाल के दिनों में जिस प्रकार बिहार की एनडीए सरकार का पार्ट रहते हुए भाजपा को तेवर दिखाए हैं, उससे साफ है कि वे पलटी मार सकते हैं। ऐसे में वे स्वाभाविक तौर पर पीएम पद के उम्मीदवार हो जाएंगे। राहुल गांधी के पीएम उम्मीदवार घोषित किए जाने का वे पहले भी विरोध कर चुके हैं।

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