Home दुनिया आखिर क्यों 177 सालो से बोतल में बंद है, इस शख्स का सिर !

आखिर क्यों 177 सालो से बोतल में बंद है, इस शख्स का सिर !

1 second read

प्राचीन मिस्र में इंसानों के शवों को ममीकृत किया जाता था, जिनकी ममी आज भी आए दिन मिलती रहती हैं। दुनिया में बहुत से देशों में अब भी मानव शरीर को प्रीज़र्व करके रखा जाता है। ऐसा साइंस लेबोरेटरी में भी देखने को मिलता है कि मेंढक, सांप, बिच्छू जैसे कुछ जानवरों को लिक्विड सलूशन में डालकर प्रीज़र्व किया जाता है, जिससे वो सालों-साल सुरक्षित रह सके।

आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसी यूनिवर्सिटी के बारे में जहां एक इंसान के सिर को करीब डेढ़ सौ सालों से एक बोतल में बंद करके रखा हुआ है। यह सिर एक कुख्यात सीरियल किलर का है। जार में बंद इस शख्स का नाम “डिएगो एल्वेस” था, जो पुर्तगाल का एक सबसे खतरनाक सीरियल किलर था। इस सीरियल किलर के बारे में बहुत सी कहानियां प्रचलित हैं।

इसकी दरिंदगी के किस्से आज भी पुर्तगाल की गलियों में आम हैं। कुख्यात सीरियल किलर, जिसका नाम सुनते ही आज भी पुर्तगाल के लोगों की रूह कांप जाती है। डिएगो एल्वेस का जन्म 1810 में स्पेन के “गैलिसिया” में हुआ था। गरीब परिवार में जन्मा डिएगो काम की तलाश में बहुत दिनों तक भटकता रहा। आखिरकार वह पुर्तगाल की “लिस्बन सिटी” पहुंचा।

लिस्बन सिटी में भी डिएगो को निराशा के अलावा कुछ हाथ ना लग सका। ऐसे में उसने जुर्म की राह अपना ली और वह पुर्तगाल का सबसे पहला और खूंखार सीरियल किलर बन गया। डिएगो एल्वेस उन किसानों को लूटता था, जो अपना अनाज और सब्जियां बेचकर शहर से वापस अपने घर लौटा करते थे। अपनी दरिंदगी का शिकार बनाने के लिए डिएगो ने एक पुल को चुना था।

वो वहां से गुजरने वाले राहगीरों को अपना शिकार बनाता था। वह पहले उनसे लूटपाट करता था फिर बेरहमी से उनकी हत्या करके उन्हें पुल से नीचे फेंक देता था। रोजाना सामने आ रही लाशों के पीछे पहले पुलिस को लगा कि शायद आर्थिक तंगी के कारण आत्महत्या कर रहे हैं। बाद में जांच करने पर पुलिस को नदी से कुछ ऐसे शव मिले जिनके शरीर पर धारदार हथियारों से घाव के निशान थे।

इससे पुलिस को शक हो गया कि किसानों की हत्या की जा रही है। पुलिस ने सख्ती के साथ जब जांच शुरू की तो डिएगो ने लूटपाट बंद कर दी। इसके बाद डिएगो 3 साल तक अंडरग्राउंड हो गया। डिएगो समझ गया था कि अगर वह अकेला रहा, तो वह बड़ी लूटपाट नहीं कर पाएगा और उसके पकड़े जाने का खतरा बना रहेगा। इसी के चलते उसने ऐसे लोगों को तलाशना शुरू कर दिया जो बहुत गरीब थे।

ऐसा करके उसने दर्जनों लोगों की गैंग बना ली और बड़ी-बड़ी वारदातों को अंजाम देना शुरू कर दिया। वो अपनी गैंग के साथ दिन में अक्सर जंगल में छिपा रहता था। एक दिन गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने आखिरकार उस खूंखार सीरियल किलर डिएगो को गिरफ्तार कर लिया। लिस्बन सिटी के पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक डिएगो को लोगों को क्रूरता से मारने में मजा आता था।

वह तब तक इंसान के शरीर को नोचता रहता था, जब तक कि वह प्राण ना त्याग दें। इसके चलते 1841 में उसे 70 से अधिक व्यक्तियों की क्रूर हत्या के आरोप में फांसी की सजा सुनाई गई। डिएगो को जब फांसी दी गई तब पुर्तगाल में मस्तिष्क विज्ञान एक प्रसिद्ध विषय था। मस्तिष्क विज्ञान में मस्तिष्क की उन कोशिकाओं की जांच की जाती थी जिनसे इंसान के व्यक्तित्व का पता लगाया जा सकता था।

वैज्ञानिकों ने अदालत से अनुरोध किया कि डिएगो को फांसी देने के बाद उसका सिर उन्हें दे दिया जाए। वैज्ञानिक यह पता लगाना चाहते थे की डिएगो में इतनी क्रूरता कहां से आई। अदालत ने भी यह आदेश दिया की डिएगो को फांसी देने के बाद उसका सिर वैज्ञानिकों को सौंप दिया जाए।

इसके चलते डिएगो का सिर हमेशा के लिए प्रीजर्व कर दिया गया, जो अब भी लिस्बन की यूनिवर्सिटी में रखा हुआ है। डिएगो पर 1909 में “ओस क्राइम्स दे डिएगो एल्वेस” नाम की एक फिल्म भी बन चुकी है, जो पुर्तगाल की हिट फिल्मों में से एक है।

Load More Related Articles
Load More By lokmat live desk
Load More In दुनिया

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Check Also

विशाल सिंह के नेतृत्व में क्षत्रिय महासभा ने कराया पटना बंद

Sc/st एक्ट के विरोध में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा द्वारा आज पटना के पाटलिपुत्र में भारत …