Home दुनिया ट्रम्प ने किम को दी धमकी वक्त से पहले टूट गयी ट्रंप-किम की सिंगापुर शिखर वार्ता!

ट्रम्प ने किम को दी धमकी वक्त से पहले टूट गयी ट्रंप-किम की सिंगापुर शिखर वार्ता!

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ये कैसी शिखर वार्ता करने जा रहे हैं डोनाल्ड ट्रम्प और किम जोंग उन? शिखर वार्ता का एजेंडा धमकियों से सेट हो रहा है। अमेरिका की ताजा धमकी ये है कि किम जोंग उन उनकी बात मानने का ऑफर मान लें अन्यथा उन्हें बर्बाद कर दिया जाएगा। ये धमकी उत्तर कोरिया की उस धमकी के जवाब में आयी है जिसमें उसने ऑपरेशन ठंडर के विरोध में दक्षिण कोरिया से शिखर वार्ता रद्द कर दी थी और सिंगापुर में अमेरिका के साथ शिखर वार्ता तोड़ने की भी धमकी दे डाली थी।

किम जोंग उन को बर्बाद करने की धमकी देते हुए डोनाल्ड ट्रम्प कह रहे हैं कि वार्ता के लिए तैयार हो जाओ वर्ना कर्नल गद्दाफी जैसा हाल होगा। यह कैसी शांति वार्ता करने जा रहे हैं ट्रम्प। यह वार्ता होने से पहले ही टूट गयी लगती है।

सिंगापुर की वार्ता तय हो जाने के बाद धमकी की शुरूआत दरअसल अमेरिका ने ही की थी। अमेरिकी राष्ट्रपति के ऐतिहासिक ट्वीट के बाद तय तारीख 12 जून से तकरीबन एक महीने पहले अमेरिका ने वार्ता का एजेंडा तय कर दिया। मगर, एजेंडे की भाषा सख्त थी –

“हमारी नीति कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्ण और स्थिर परमाणु निरस्त्रीकरण को सुनिश्चित करना है। ट्रंप इसी मकसद से प्रयास करेंगे।”
अमेरिका यहीं नहीं रुका। उसने वार्ता रद्द करने की भी धमकी दे डाली-

हमारे पास अभी एक माह का वक्त है। इस दौरान कई चीजों मसलन उत्तर कोरिया की उकसावे वाली किसी भी तरह की हरकत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मैं इतना ही कह सकता हूं कि मुलाकात पर सहमति भले ही बन गई हो लेकिन जाहिर है कि कई कारणों से इसे स्थगित भी किया जा सकता है।”

उत्तर कोरिया की जवाबी धमकी के बाद अमेरिका ने दोबारा धमकी दी है और इस बार ये धमकी अपनी सभी हदें पार करता है। इसके बाद वास्तव में लगता है कि शिखर वार्ता शायद ख़तरे मे पड़ गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने किम जोंग-उन को अपनी बात मानने का ऑफर दिया है। अपने किस्म का यह विचित्र ऑफर है। इसमें साफ-साफ धमकी दी गयी है। ट्रंप ने कहा है कि अगर किम परमाणु हथियार कार्यक्रम छोड़ देते हैं, तो सत्ता में बने रहेंगे। लेकिन अगर वह वॉशिंगटन के साथ समझौते से इनकार करते हैं तो उन्हें ‘तबाह’ कर दिया जाएगा।

उत्तर कोरिया की धमकी घूम-फिरकर सामने आयी थी और उसका पुख्ता आधार भी नहीं है। मगर, अमेरिकी राष्ट्रपति तो खुद धमकी दे रहे हैं जिसका आशय है कि मेरी बात मानो या फिर भुगतो।

बात-बात में धमकी देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति जब उत्तर कोरिया को सुरक्षा देने की बात करते हैं तो वह विश्वसनीय कम नाटकीय ज्यादा लगता है। ट्रम्प कहते हैं-

अगर वह अपने परमाणु हथियारों को त्यागते हैं तो मैं किम को ‘सुरक्षा’ प्रदान करने के लिए ‘बहुत कुछ करने’ के लिए तैयार हूं।“ ट्रंप ने आगे कहा, “उन्हें सुरक्षा दी जाएगी, जो बहुत मजबूत होगी…. सबसे अच्छी बात यह होगी कि वह समझौता कर लें।“

अमेरिका ने गददाफी के विरोधियों के हाथों उसे मरवाने से पहले उसके साथ भी शांति और निरस्त्रीकरण की संधि की थी और बदले में अमेरिकी मदद का भरोसा दिलाया था। अब अमेरिका उसी गद्दाफी जैसा हश्र किम जोंग उन का भी करने की धमकी दे रहा है। तस्वीर डेलीमेल.को.यूके।
डोनाल्ड ट्रम्प की सबसे खतरनाक धमकी ये है कि अगर किम परमाणु कार्यक्रम बंद नहीं करते हैं तो उनकी दुर्दशा लीबियाई के नेता मअम्मर गद्दाफी की तरह होगी जिन्हें 2011 में नाटो के समर्थन वाले विद्रोहियों ने सत्ता से बेदखल कर मार गिराया था। डोनाल्ड ट्रम्प ने धमकी दी है-

कोई समझौता नहीं होने की स्थिति में लीबिया मॉडल अपनाया जा सकता है।“
दुनिया को याद है कि 2003 में अमेरिका से आर्थिक सहायता के बदले सामूहिक विनाश के हथियार को समाप्त करने पर लीबिया सहमत हो गया था। इसके बावजूद अमेरिका ने विद्रोहियों के हाथों उसका अंत करवा दिया।

उत्तर कोरिया के राष्ट्रपति किम जोंग उन को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भी समर्थन है। उत्तर कोरिया को लीबिया समझने की गलती ना करे अमेरिका।

जाहिर है उत्तर कोरिया को लीबिया समझने की गलती कर रहा है अमेरिकी प्रशासन। उत्तर कोरिया के पास अमेरिका पर हमला करने की ताकत है, बदला लेने की ताकत है जो लीबिया के पास नही था। उत्तर कोरिया अमेरिकी दोस्त जापान और दक्षिण कोरिया से भी दो-दो हाथ करने की क्षमता रखता है। इसके अलावा चीन और रूस की भी सहानुभूति उत्तर कोरिया के साथ है।

ऐसा लगता है कि 12 जून को शिखर वार्ता से पहले ही अमेरिका और उत्तर कोरिया के राष्ट्रप्रमुखों ने वार्ता तोड़ दी है। विश्व शांति और निरस्त्रीकरण करने का मकसद रखने वाले एक-दूसरे को तबाह करने की धमकी नहीं दिया करते। अमेरिका और एकीकृत सोवियत संघ में इसी मकसद से परमाणु अस्त्रों के निरस्त्रीकरण हुआ था। तब कभी भी ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं हुआ था। ट्रंप ने धमकी के साथ सुरक्षा की अनमोल नीतियों का अनुसरण किया है। सिंगापुर की शिखर वार्ता समय से पहले टूट चुकी लगती है। इसकी औपचारिक घोषणा का बस इंतज़ार है।

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