Home बिहार पटना की गैस एजेंसियां एवं गोदाम सुरक्षा मानक में हुए फेल, कभी भी हो सकते हैं बड़े हादसे

पटना की गैस एजेंसियां एवं गोदाम सुरक्षा मानक में हुए फेल, कभी भी हो सकते हैं बड़े हादसे

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पटना सिटी में आज हुए भीषण गैस गोदाम हादसे के बाद हमने पटना के रिहायशी इलाकों में स्थित कुछ गैस एजेंसियां एवं गोदामों की पड़ताल की। घनी आबादी के बीच स्थित गैस गोदामों से खतरा बना हुआ है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए ऐसे गोदामों को शहर से बाहर ले जाने के प्रति जिला प्रशासन भी खामोश है।

यही कारण है कि आसपास रहने वाले लोगों में हमेशा अनहोनी की आशंका बनी रहती है। सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर गैस गोदाम संचालित करने की अनुमति कैसे प्रदान की गई, इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। खाद्य विभाग की अनदेखी भी संदेह को जन्म दे रहा है। अपने पड़ताल में हम पहुंचे पटना शहर के कालीकेत नगर स्थित वार्ड नंबर 39 में जहां हमने पाया कि इस घनी आबादी के बीचो-बीच गैस गोदाम का संचालन बड़े बेधड़क तरीके से हो रहा है।

हो सकते हैं बड़े हादसे, खुलकर हो रहा है सुरक्षा मानकों का उल्लंघन

बेली रोड वार्ड नंबर 39 स्थित कालीकेत नगर घनी आबादी वाला क्षेत्र है। यहां आयुषी दीप इंडेन गैस एजेंसी का बेधड़क संचालन सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर हो रहा हैं। यहां गैस गोदाम के आसपास कई सारे आवासीय मकान बने हुए हैं और वहीं गैस एजेंसी के ठीक बाजू में एक शिक्षण संस्थान भी है। इस गैस एजेंसी के आसपास कई सारे अपार्टमेंट हैं जिसमें हजारों लोगों की जनसंख्या रहती है।

कुल मिलाकर देखें तो इस गोदाम से 300 मीटर के दायरे में ही सैकड़ों आवासीय मकान है जहां लोग निवासरत हैं। यहां एक बड़ी आबादी की सुरक्षा को देखते हुए गोदाम को रखा जाना कतई भी उचित नहीं है। गोदामों में सुरक्षा मानकों की खुलकर उल्लंघन हो रही है जाने-अनजाने में लोग गोदाम के आसपास मोबाइल से बात करने में भी नहीं कतराते हैं।

एनओसी देने में अनदेखी

गैस कंपनी द्वारा एजेंसी संचालक को गोदाम स्थल चयन के लिए अनदेखी की गई। नियमों को ताक पर रखकर एनओसी प्रदान किया गया। नियमानुसार गैस गोदाम का निर्माण घनी आबादी से बाहर 5 किलोमीटर की दूरी पर होनी चाहिए। ताकि किसी अनहोनी से जनहानि ना हो और इससे कम लोग प्रभावित हो।

गौरतलब है कि पटना सिटी के मालसलामी थाना क्षेत्र के चेकपोस्ट स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम कंपनी की गृहशोभा गैस एजेंसी के गोदाम में हुई आगजनी की घटना के बाद भी यहां गोदामों की सुरक्षा को लेकर गंभीरता नहीं बऱती जा रही है। ऐसे में समझा जा सकता है कि गैस गोदामों की सुरक्षा को लेकर गोदाम संचालक, तेल कंपनियां, शासन-प्रशासन कितना गंभीर है।

गोदाम कैसा होना चाहिए, क्या नियम है

स्टोरेज एरिया के चारों ओर सेफ्टी जोन बनाया जाता है जो खाली होता है। जैसे 6000 किलो क्षमता का गैस गोदाम है तो उसके चारों तरफ करीब 15 फीट एरिया खाली रखा जाता है। जो दीवारें होती हैं उसके ऊपर व नीचे के हिस्से में जालियां लगाई जाती हैं ताकि ऊपर से हल्की हवा आए तो नीचे की जाली से भारी हवा बाहर निकल जाए।

जालिया डबल कोटेड होती है ताकि बाहर आग भी जल जाए तो भीतर तक असर नहीं हो। जबकि फर्श रबर कोटेड डामर का बनाया जाता है ताकि घर्षण नहीं हो। साथ ही अग्निशमन उपकरण तथा बालू भरी बाल्टियां होना जरूरी होता है ताकि जरूरत पड़ने पर इन उपकरणों का उपयोग किया जा सके और बड़े खतरों से बचा जा सके।

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