Home प्रदेश उत्तर प्रदेश में अति पिछड़ों को लुभाने के लिए आरक्षण में बदलाव की तैयारी

उत्तर प्रदेश में अति पिछड़ों को लुभाने के लिए आरक्षण में बदलाव की तैयारी

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2019 के चुनाव में भाजपा की अति पिछड़े वर्ग के वोटरों पर है यह वही वर्ग है जिसके बूते 2014 में भाजपा प्रचंड बहुमत से केंद्र में सत्ता में आई थी । दरअसल उत्तर प्रदेश में धुर विरोधी मायावती और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के साथ आने के बाद से ही भारतीय जनता पार्टी की बेचैनी जो है वह बढ़ चुकी है । योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही सरकार के आगे यह बड़ी चुनौती साबित हो रही है खासकर उत्तर प्रदेश में लोकसभा के उपचुनाव के जो परिणाम आए उसके बाद से भाजपा की बेचैनी और बढ़ गई है

ऐसे में भारतीय जनता पार्टी निश्चित रूप से राज्य में कुछ ऐसा करके एक विशेष जाति वर्गों को अपनी तरफ खींचने का प्रयास कर रही है। राज्य सरकार अति पिछड़ी जातियों को उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण का लाभ देना चाहती है । अति पिछड़ी जातियों को अपने पक्ष में लुभाने के लिए सरकार इसे अन्य पिछड़ा वर्ग कोटा के भीतर अलग कोटे में आरक्षण देने की तैयारी कर रही है ।

अगर सरकार ऐसा करने में सफल रही तो आगामी चुनाव में उसके लिए यह सबसे प्रभावी हथियार साबित होगा अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए सरकारी नौकरियों में 27 फ़ीसदी आरक्षण की व्यवस्था है ।अब तक इस आरक्षण का सर्वाधिक लाभ मात्र कुछ जातियों को ही मिला है मसलन ओबीसी आरक्षण में सिर्फ 9 फ़ीसदी आबादी के बावजूद यादों की नौकरियों में हिस्सेदारी 132 फ़ीसदी तक है । इसी तरह ओबीसी में कुर्मी जाति के लोगों की आबादी सिर्फ 5 फ़ीसदी है नौकरियों में हिस्सेदारी 242% तक है ।ऐसी कई जातियां हैं OBC आदि में 14%हिस्सेदारी रखती है पर आबादी के अनुपात में 70 % ही नौकरिया मिली है ।

कुल मिलाकर देखा जाए तो जातीय समीकरण और सामाजिक व्यवस्था के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला कहीं ना कहीं से सही है क्योंकि आरक्षण के नाम पर OBC लेयर में ही अगर कुछ जातियां इसका लाभ उठा रही हैं तो यह गलत है और निश्चित रूप से सरकार को यह देखना चाहिए ताकि वह भी सी में आने वाले हर एक जातियों को बराबर का हक मिल सके और वह समाज में अपने सामाजिक समीकरण में आगे बढ़ सके

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