Home बिहार जन्मदिन विशेष: गरीबी से लड़के रिक्शा चालक से बने बिहार सीएम, कुछ ऐसा है लालू यादव का सफर

जन्मदिन विशेष: गरीबी से लड़के रिक्शा चालक से बने बिहार सीएम, कुछ ऐसा है लालू यादव का सफर

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अपने मसखरेपन के लिए पहचाने जाने वाले राजनीति के महारथी लालू प्रसाद यादव सोमवार को 70 साल के हो गए. सड़क हो या संसद, गंभीर मुद्दों पर उनका मसखरापन माहौल को हल्का बनाने के लिए काफी होता है.

राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव सोमवार को 70 साल के हो गए। 11 जून 1948 को बिहार के गोपालगंज के फुलवरिया गांव में लालू का जन्म हुआ था। साल 1973 में दोनों की शादी हुई थी। शादी के दौरान लालू को उनसे ससुराल से सोना के अलावा कई सामान मिला था।

44 साल पहले जब दोनों की शादी हुई तो लालू की उम्र 25 जबकि राबड़ी की उम्र 14 साल थी। लालू और राबड़ी की शादी विवादों के बीच में हुई थी। शादी के बाद दोनों की मैरिड लाइफ अच्छी चलने लगी। तब लालू ने कहा था कि राबड़ी उनके लिए लकी हैं। उनके आने के बाद से ही उनकी लाइफ बदल गई।

इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शादी के चार साल बाद यानी 1977 में लालू लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। लालू के संसद जाने के बाद भी दोनों की लाइफ स्ट्रगल वाली रही। एक तरफ लालू राजनीति में जमते जा रहे थे तो दूसरी ओर राबड़ी घर की जिम्मेदारी बखूबी निभा रही थीं। राबड़ी दूध का कारोबार घर से ही करती थीं।

चाय की दुकान पर मजदूरी देश की राजनीति में एक अलग पहचान रखने वाले लालू यादव की ख्वाहिश डॉक्टर बनने की थी लेकिन संयोग और हालात उन्हें राजनीति में खींच लाएं। 11 जून 1948 को गोपालगंज में जन्में लालू बचपन में चाय की दुकान पर मजदूरी किया करते थे।

उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि वे एक दिन बिहार के मुख्यमंत्री बनेंगे। बचपन के दिनों में उनकी गरीबी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके पास पढ़ाई की फीस देने के लिए पैसे तक नहीं होते थे इसके बदले वे अपने शिक्षक को गुड़ और चावल देते थे।

लालू छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे। 1971 में लालू प्रसाद पटना विवि छात्र संघ के चुनाव में शामिल होकर संघ के महासचिव बने। फिर, जयप्रकाश नारायण की संपूर्ण क्रांति से जुड़े। आपातकाल के दौरान गिरफ्तार होकर जेल भी गए। संपूर्ण क्रांति के दौरान एक बार उनके मरने की अफवाह फैल गई थी।

18 मार्च 1974 को आंदोलन हिंसक हो गया था। छात्र सड़कों पर उतर आए थे। उनमें लालू भी शामिल थे। आंदोलन रोकने के लिए सेना के जवान सड़क पर उतर आए और लालू की पिटाई की। इसी दौरान अफवाह फैल गई कि सेना की गई पिटाई में लालू की मौत हो गई है।

जेपी आंदोलन के दौरान लालू ने अपनी छवि एक जुझारू नेता के रूप में बना ली। आगे1977 में आम चुनाव हुआ तो लालू सांसद चुने गए। फिर,1980-1985 में विधायक रहे। 1990 में लालू बिहार के मुख्‍यमंत्री बन गए। चारा घोटाला में जेल गए। जेल से निकलने के बाद फिर मुख्‍यमंत्री बने। केंद्र में मंत्री रहे और अब उनके दोनों बेटे बिहार की राजनीति में अहम स्‍थान बना चुके हैं।

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