Home लोकमत स्पेशल क्या 4 साल की बेटी का गला काटकर हलाल करने से रमजान में अल्लाह खुश होते हैं!

क्या 4 साल की बेटी का गला काटकर हलाल करने से रमजान में अल्लाह खुश होते हैं!

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राजस्थान में जोधपुर के पीपाड़ शहर में हुई चार साल की मामूम बच्ची की गला रेत कर हत्या का दोषी उसके पिता को ही पाया गया है. आरोपी ने पुलिस के सामने अपना गुनाह कबूल करते हुए कहा कि वो एक बहुत धार्मिक व्यक्ति है और रमजान के पवित्र महीने में अल्लाह को खुश करने के लिए उसने अपनी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी दी है.

सच्चा मुसलमान : रमज़ान का पवित्र महीना चल रहा है, मौलवी मौलानाओं का कहना है किताब में लिखा है कि अल्लाह ने फरमाया है कि जो उसे मानता हो वो अपनी सबसे प्यारी चीज़ कुर्बान करे, जोधपुर के नवाब अली कुरेशी ने भी वही किया, उसे अपनी 4 साल की बच्ची जान से भी ज़्यादा प्यारी थी, अल्लाह के फरमान के अनुसार उसने अपनी बच्ची का गला रेतने से पहले बाकायदा कलमा पढ़ कर अल्लाह को याद किया अल्लाह को हाज़िर नज़ीर मान कर छुरा चला दिया, लेकिन अफसोस जैसा किताब में लिखा था वैसा नही हुआ, अफसोस कि बच्ची के बदले कोई बकरा हाज़िर नही हुआ, अफसोस कि अल्लाह ने उसे मानने वाले उसके सबसे सच्चे मोमिन को ही धोखा दे दिया? तो क्या अल्लाह धोखा दे सकता है? या धोखा दिया धर्म की व्याख्या करने वाले मौलाना मौलवियों ने ??

यकीन मानिए मुझे दिल से अफसोस हो रहा है इस वक्त इस पोस्ट को लिखते समय, आज अल्लाह से यही शिकायत है कि क्यो नही आये उस बच्ची को बचाने? आज मानो इस मौत ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया हो, लेकिन जितने सवाल में अल्लाह से करता हूँ उनके जवाब अल्लाह की तरफ से मेरा दिल हर बार यही कह कर देता है कि “मैंने ऐसा कब कहा? तुमने खुद ही किताब लिख ली, जो मन किया लिख लिया, अब मैं क्या करूँ? अगर मैंने कहा होता तो मैं बचाता” ।

नवाब अली तुम दुनियां की नज़र में कातिल होंगे पर मेरी नज़र में नही हो, क्योकि तुमने वो किया जो तुम्हारे धर्म ने तुम्हारे इस्लाम ने कहा, तुमने वो किया जो किताब में लिखा था, तुम्हारा कुसूर सिर्फ इतना है कि तुम भोले हो, तुमने सब पर विश्वास किया बस इतना ही गुनाह है तुम्हारा, ये बात सिर्फ वो इंसान समझ सकता है जिसे भगवान में अटूट विश्वास हो, उसे भी था अल्लाह में, बस गलती सिर्फ इतनी सी थी कि मौलानाओं पर विश्वास कर के कहानियों को सच मान बैठा ये भोला भाला इंसान ।

गलती अगर किसी की है तो उन मौलानाओं की है जिन्होंने उसे सच नही बताया, जिन मौलानाओं ने आज तक खुद तो किताब का पालन करते हुए कुर्बानी नही दी पर बाकियों को समझाया कि उन्हें सबसे प्यारी चीज़ की कुर्बानी देनी है, नवाब अली सच्चा मुसलमान है जबकि मौलाना बाजार से बकरा ला कर काटने वाले अल्लाह को धोखा देने वाले मुसलमान है, या तो ये मौलवी झूठे हैं इनकी किताब झूठी है क्योकि अल्लाह तो झूठा हो नही सकता, इसलिए इसकी सज़ा इस बेचारे नवाब अली को नही इन मौलानाओं को मिलनी चाहिए, कत्ल अगर किसी का हुआ है तो वो नवाब अली के विश्वास का ।

नवाब अली मेरी संवेदनाये आपके साथ हैं, अपने धर्म की राह में सर्वोच्च कुर्बानी दी है, अल्लाह इसे ज़रूर कुबूल करेगा, मेरी नज़र में आज तुम सिर्फ और सिर्फ सच्चे मुसलमान हो, सारे मौलानाओं से हज़ार गुना बेहतर हो, इन मौलानाओं ने सालो पाठ पढ़ाये लेकिन ये आज तक अल्लाह पर भरोसा नही कर पाए, जबकि अपने पूरा भरोसा किया, ऐसा अटल विश्वास मैंने आज तक नही देखा ।

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