Home बिहार बिहार की सियासत के लिए अहम है 13 जून की शाम

बिहार की सियासत के लिए अहम है 13 जून की शाम

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बिहार में अभी एनडीए सत्ता में है और महागठबंधन विपक्ष में। पिछले साल 26 जूलाई से पहले स्थित अलग थी। तब एनडीए विपक्ष में था और सत्ता महागठबंधन के पास थी। जनता ने 2015 के विधान सभा चुनाव में सत्ता महागठबंधन ही को सौंपा था। इस दौरान गंगा से बहुत पानी बह चुका है लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर पहले भी और आज भी नीतीश कुमार ही बिराजमान हैं। उनकी पार्टी जदयू एनडीए में बड़े भाई का रोल निभाने के लिए भाजपा पर दबाव बना रही है। जदयू के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी से लेकर श्याम रजक तक पार्टी के लिए मांग चुके हैं बिहार में लोक सभा की ज्यादा सीटें, लेकिन भाजपा का कोई जवाब नहीं आया है। माना जाता है कि राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के नेता और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा जदयू की डिमांड पर भाजपा की प्रतिक्रिया ही इंतजार कर रहे हैं।

बिहार की राजनीति पर नजर रखने वाले बताते हैं कि जब से नीतीश कुमार एनडीए में दोबारा आए हैं, उपेंद्र कुशवाहा की परेशानी बढ़ गई है। माना जाता है कि समाज के जिस ग्रूप को नीतीश कुमार अपना जनाधार मानते हैं, उपेंद्र कुशवाहा का भी उसी पर दावा है। ऐसे में वोट बैंक के लिहाज से दोनों एक ही जगह अपने-अपने कद को ऊंचा करने की कोशिश में हैं। उपेंद्र कुशवाहा की परेशानी यह है कि एनडीए में नीतीश कुमार को बड़ा रोल मिलने से उनका कद घट जाएगा। इस बीच राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने पहले एक खुले मंच से उपेंद्र कुशवाहा को महागठबंधन में आने का न्योता दिया और फिर मंगलवार को एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि रालोसपा नेता महागठबंधन में आएंगे ही क्योंकि एनडीए में उनको महत्व नहीं दिया जा रहा है। इससे पहले हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने भी उपेंद्र कुशवाहा को महागठबंधन में आने की दावत दी। उपेंद्र कुशवाहा माहगठबंधन के नेताओं की बात को न केवल नकारते रहे हैं बल्कि साथ में यह भी कहते रहे हैं वे एनडीए ही में रहेंग।

लेकिन कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं जो बिहार में बदलते राजनीतिक माहौल की ओर संकेत कर रही हैं। मिसाल के तौर पर भाजपा की तरफ से एनडीए के लिए आयोजित भोज में उपेंद्र कुशवाहा नहीं गए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इफ्तार की दावत की तो वहां भी नजर नहीं आए। रामविलास पासवान के यहां भी इफ्तार की दावत से उपेंद्र कुशवाहा गायब रहे। उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और भाजपा के वरिष्ठ नेता शाहनवाज हुसैन ने इफ्तार की दावत की वहां भी उपेंद्र कुशवाहा नहीं दिखे और जब उपेंद्र कुशवाहा ने इफ्तार की दावत की तो भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय के अलावा भाजपा, जदयू और रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी का कोई भी बड़ा नेता नहीं पहुंचा।

इस सबके बीच 13 जून यानि बुधवार को तेजस्वी यादव और जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह की तरफ से इफ्तार की दावत का आयोजन किया गया है। इन दोनों इफ्तार पार्टियों में नेताओं के जमावड़े से यह बहुत हद तक साफ हो जाएगा कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति का रुख क्या होगा।

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