Home लोकमत स्पेशल नेताओं के झूठे वादों से परेशान होकर गाँव वालों ने फसल बेच खुद किया सड़क निर्माण!

नेताओं के झूठे वादों से परेशान होकर गाँव वालों ने फसल बेच खुद किया सड़क निर्माण!

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हमारे देश में भ्रष्टाचार और सरकारों की कामचोरी किसी से छिपी हुई नहीं है। चुनावों के बाद नेता किस तरह ईद का चाँद हो जाते हैं ये सभी जानते हैं, नेता चुनाव से पहले विकास के बड़े बड़े वादे करते हैं और चुनाव जीतने के बाद अपने वादों को भूल जाते हैं. आम आदमी अपनी समस्याओं को लेकर बस नेता और अधिकारीयों के दरवाजों पर चप्पलें ही घिसता रह जाता है. लेकिन उसे मिलता है सिर्फ झूठे वादे. और इन झूठे वादों से तंग आकर आम आदमी खुद चीजों को करने लगता है.

ऐसा ही एक मामला सामने आया है मध्यप्रदेश के मुरेना जिले की सबलगढ़ तहसील के एक गाँव नाईडांडा (बामसोली) से. इस गाँव के लोगों ने नेताओं के झूठे वादों से तंग आकर खुद ही अपने गाँव के लिए सडक निर्माण का कार्य करने लगे.

नाईडांडा गाँव मुख्य सड़क मार्ग से 1.5 किमी अन्दर बसा है, जहाँ तक जाने के लिए गाँव के लोगों को कच्चे मार्ग का उपयोग करना पड़ता है. इस मार्ग में बरसात के दिनों में कीचड़ और फिसलन हो जाती है. जिसकी वजह से गाँव वालों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

बरसात में गाँव का पूरा रास्ता फिसलन और कीचड़ से भरा हुआ हो जाता था. इस रास्ते को पैदल भी पार करना बहुत मुश्किल होता था. गाँव में अगर कोई महिला गर्भवती है तो उसे गाँव वाले खड़िया के सहारे अस्पातल ले जाते थे. कई बार समय पर ईलाज ना मिलने की वजह से लोगों की मौत भी हो जाती थी.

गाँव वाले अपनी इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय नेताओं और अधिकारीयों से भी मिले, लेकिन गाँव वालों को समस्याओं के हल की जगह मिला सिर्फ झूठा दिलासा. इस झूठे दिलासे से तंग आकर गाँव वालों ने ही सड़क निर्माण का कार्य शुरू कर दिया.

फसल बेचकर किए पैसे इकठ्ठे –

गाँव के लोगों ने अपनी सामर्थ्य के हिसाब से रुपये इकठ्ठे किए. गाँव वाले इस इस पैसों का इतंजाम पिछले 2 महीनों से कर रहे थे. लोगों ने अपनी फसल बेचकर सड़क निर्माण के लिए पैसे दिए.

चुनाव में वोट ना डालने की खाई कसम- गाँव वालों का कहना है कि वो नेताओं के झूठे वादों ने तंग आ गये हैं. इसीलिए वो आने वाले किसी भी चुनाव में अपना मत किसी भी नेता को नहीं देंगे. गाँव वालों का कहना है कि वो प्रजातंत्र की रक्षा के लिए नोटा वटन पर ही वोट डालेंगे.

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