Home बिहार महागठबंधन में नीतीश की वापसी पर रणनीति आई सामने,तेजस्वी का सीएम बनने का रास्ता होगा साफ!

महागठबंधन में नीतीश की वापसी पर रणनीति आई सामने,तेजस्वी का सीएम बनने का रास्ता होगा साफ!

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महागठबंधन में नीतीश कुमार को शामिल कराने के लिए कांग्रेस ने खोल दिया है मोर्चा। दरअसल, कांग्रेस बिहार में सत्ता से बाहर नहीं होना चाहती थी। लेकिन, नीतीश कुमार के महागठबंधन से हटने के बाद उनकी स्थिति दयनीय हुई है। अगर नीतीश महागठबंधन में फिर से आ जाते हैं तो कांग्रेस एक बड़ी भूमिका में आ जाएगी। वहीं, तेजस्वी यादव के सीएम बनने का रास्ता भी साफ हो जाएगा। महागठबंधन की ओर से नीतीश कुमार को दिल्ली भेजने की तैयारी भी है।

नीतीश कुमार पर बिहार में चल रही है बड़ी राजनीति.
महागठबंधन से नीतीश कुमार के अलग होने के बाद राज्य में उनकी छवि लगातार खराब हुई है। नीतीश कुमार अपनी छवि को लेकर हमेशा सजग रहते हैं। जुलाई 2017 में जब नीतीश कुमार महागठबंधन से अलग हो रहे थे। उस समय भी उनकी छवि पर सवाल खड़ा हुआ था। एक बार फिर उनकी छवि संकट में है। दरअसल, महागठबंधन से अलग होने के बाद राजद नेता तेजस्वी यादव ने पूरे राज्य में घूमकर नीतीश कुमार को जनादेश का हत्यारा तक करार दे दिया। महागठबंधन में शामिल होने के बाद नीतीश कुमार की जदयू को 70 और लालू प्रसाद की राजद को 80 सीट विधानसभा में मिली थी। वहीं, कांग्रेस के हिस्से 27 सीट गई थी। दूसरी तरफ भाजपा महज 53 सीटों पर सिमट कर रह गई थी।

जदयू ने भाजपा के साथ गठबंधन कर राज्य में तो सरकार बना ली। लेकिन, तेजस्वी यादव उनके खिलाफ लगातार बोल रहे हैं। लोगों के बीच वह असर भी होता दिख रहा है। इसका परिणाम राज्य में पिछले दिनों हुए उपचुनाव में देखने को मिला है। जहानाबाद उपचुनाव में हार के बाद जोकीहाट विधानसभा उपचुनाव की हार ने नीतीश कुमार की नींद उड़ा दी है। इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में मिली हार ने एनडीए में उनकी छवि को कमजोर किया है। वहीं, महागठबंधन मुखर होकर उनके खिलाफ हमला बोल रहा है। नीतीश कुमार एक बार फिर बीमार हो गए हैं। कांग्रेस दूसरी तरफ नीतीश कुमार को एक बार फिर महागठबंधन में शामिल कराने को लेकर मोर्चा खोले बैठी है। इस सब के पीछे एक खेल सीधे-सीधे दिख रहा है।

तेजस्वी के लिए सीएम पद की कुर्सी खाली कराने में जुटी है कांग्रेस, बना रही बड़ी रणनीति.

कांग्रेस विधायक मुन्ना तिवारी कहते हैं कि लोकसभा चुनाव 2019 से पहले नीतीश कुमार महागठबंधन में शामिल हो जाएंगे। दूसरी तरफ राजद के तेजस्वी यादव और उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव महागठबंधन में नीतीश कुमार की नो एंट्री का बोर्ड लेकर घूम रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस नीतीश कुमार को लगातार महागठबंधन में शामिल होने के लिए क्यों दबाव बना रही है? इस पर सवाल खड़ा होना शुरू हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो नीतीश कुमार की बेदाग छवि कांग्रेस को अधिक सूट करती है।

हालांकि, कांग्रेस-राजद को भी नहीं छोड़ने वाली है। ऐसे में राजद नेताओं का व्यवहार ऐसा लग रहा है, जैसे वह कुछ अधिक की मांग में जुटे हैं। मतलब साफ है कांग्रेस ने अगर नीतीश कुमार को महागठबंधन में शामिल होने की शर्त मुख्यमंत्री की कुर्सी से संतोष करने पर राजी कर लिया, तो तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री बनने की संभावना तेज हो जाएगी। वहीं, नीतीश कुमार को महागठबंधन का चेहरा बनाकर बिहार से दिल्ली भेजने पर भी सहमति बन सकती है। एक संभावना यह भी दिख रही है की महागठबंधन राहुल गांधी की बजाय नीतीश कुमार को नरेंद्र मोदी के विकल्प के रूप में पेश कर सकती है। हालांकि, यह संभावना अभी कयासों के ही दौर में है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नीतीश कुमार पर महागठबंधन के नेताओं का भरोसा कम हुआ है। जिस प्रकार जुलाई 2017 में हुए पलटी मार कर एनडीए के साथ चले गए थे। ऐसे में यह भी वह लोग सोचेंगे कि 2019 चुनाव के बाद नीतीश कुमार एक बार फिर एनडीए के साथ जा सकते हैं। इसलिए नीतीश कुमार को डैमेज करने की खातिर और एनडीए से बाहर निकालने के लिए पूरा ड्रामा रचा जा रहा हो। नीतीश कुमार बीमार हैं, इसलिए कुछ नहीं बोल रहे। लेकिन यह बीमारी कई बार राजनीतिक बदलाव के रूप में सामने आ चुकी है।

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