Home देश एक साथ चुनाव पर नहीं बनती दिख रही आम राय

एक साथ चुनाव पर नहीं बनती दिख रही आम राय

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एक देश एक चुनाव की बात वैसे लंबे समय से चली आ रही है. हालांंकि इसे मजबूती प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने केंद्र में सरकार बनने के साथ कोशिशें शुरू कर दी थीं. चुनाव आयोग ने भी इस पर हामी भर दी थी. इसके बाद विधि आयोग और नीति आयोग इस दिशा में लगातार काम कर रहे थे. अब विधि आयोग ने राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श शुरू किया है. लेकिन उसे अपेक्षित सफलता मिलती नहीं दिख रही है.

वैसे तो पहले से ही विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से अपनी राय सार्वजनिक कर दी गई थी कि वर्तमान परिस्थितियों में एक साथ चुनाव संभव नहीं है. इसके बावजूद इस पर जोर दिया जा रहा है. सन 2014 का लोकसभा चुनाव जीतने के बाद से ही भाजपा इसे अपने पक्ष में मानने लगी है. उसको लगता है कि अगर इसी लहर में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ हो जाएंगे, तो पूरे देश में उसकी सरकार हो जाएगी. इसीलिए भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि दोनों चुनाव एक साथ हों.

अभी हुई विधि आयोग के साथ चर्चा के बाद भी कई दलों ने इस विचार का विरोध किया. जिन छह दलों के साथ आयोग ने विचार-विमर्श किया उनमें केवल शिरोमणि अकाली दल ने इस विचार का समर्थन किया. शिरोमणि अकाली दल एनडीए गठबंधन में है. इसलिए यह उसकी राजनीतिक मजबूरी हो सकती है कि वह भाजपा और प्रधानमंत्री के साथ दिखे. इसके अलावा किसी ने इस विचार का समर्थन नहीं किया बल्कि विरोध ही किया.

तृणमूल कांग्रेस की ओर से स्पष्ट रूप से कह दिया गया कि एक देश एक चुनाव की बात अव्यावहारिक है. उसकी ओर से यह सवाल उठाया गया कि क्या बीच में लोकसभा भंग होने की स्थिति में सभी विधानसभाओं के चुनाव फिर से कराए जा सकते हैं. इसी तरह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिनिधि की भी राय थी. भाकपा प्रतिनिधि का भी कहना था कि वर्तमान हालात में एक साथ चुनाव करा पाना संभव नहीं होगा. एआईडीएमके की ओर से भी विरोध में ही राय रखी गई

हालांकि अभी विचार-विमर्श का ही दौर चल रहा है. इसके आधार पर ही भविष्य में फैसला लिया जा सकता है. लेकिन अगर इनकी राय का कोई मतलब है, तो अभी यही लग रहा है कि एक देश एक चुनाव पर शायद ही आम राय बन पाए. अगर आम राय नहीं बनती, तो इस विचार को अमली जामा पहनाना आसान नहीं होगा. यह देखना दिलचस्प होगा कि ऐसी स्थिति में भाजपा, प्रधानमंत्री मोदी और चुनाव आयोग क्या फैसला करते हैं.

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