Home बिहार तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार को भ्रष्टाचार पर घेरा बदले में नीरज कुमार के जवाब ने की बोलती बंद!

तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार को भ्रष्टाचार पर घेरा बदले में नीरज कुमार के जवाब ने की बोलती बंद!

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तेजश्वी यादव ने आज सुबह एक ट्वीट करते हुए कुछ घोटालो के नाम का जिक्र करके तेजस्वी ने मुख्यमंत्री पर हमला बोला और कहा कि अनेको घोटालों के सरताज व थीसिस चुराने वाले नीतीश चाचा अब भ्रष्टाचार से लड़ेंगे

तेजस्वी के ट्वीट पर नीरज कुमार के जवाब ने की तेजश्वी की बोलती बंद

जनता दल (युनाइटेड) के प्रवक्ता और विधान पार्षद नीरज कुमार ने पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव को अपने राजनीति गुरु अपने पिताजी लालू प्रसाद से राजनीति में भ्रष्टाचार का अर्थशास्त्र सिखने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि इसे सिखने के लिए तेजस्वी जी को विदेश जाने की जरूरत नहीं हैं।

तेजस्वी जी, आजकल राजनीति में ‘चूहा-बिल्ली’ का खेल खेल रहे हैं। ट्विटर पर प्रतिदिन एक ट्वीट कर छद्म आरोप लगाना उनका शगल हो गया है, जिससे वे अपनी उपस्थिति मीडिया में दर्ज करा सकें।

वैसे मेरी सलाह है कि उन्हें राजनीति में भ्रष्टाचार का अर्थशास्त्र सिखने के लिए विदेश जाने की जरूरत नहीं। उन्हें उनके राजनीति गुरु लालू प्रसाद ही इस विषय की अच्छी शिक्षा घर में ही दे सकते हैं, क्योंकि राजनीति में इस विषय में लालू जी से बडा कोई ’डिग्रीधारी’ विद्वान नहीं।

इसकी बानगी देखनी हो तो जिस चारा घोटाला में अदालत द्वारा लालू प्रसाद को सजा मुकर्रर किया गया है, उसी में दिख जाता है।

नीरज कुमार ने तेजश्वी को याद दिलाते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष 1988-89 में पशुपालन विभाग का कुल आवंटन 42.90 करोड रुपये थी परंतु उस वर्ष 47.90 करोड रुपये की निकासी की गई। यह भ्रष्टाचार का अर्थशास्त्र यहीं समाप्त नहीं हुआ। इसी तरह 1989-90 में इसी विभाग में आवंटन की कुल राशि 42.80 करोड रुपये थी परंतु खर्च (निकासी) 51.45 करोड, 1990-91 में कुल आवंटन की राशि 54.92 करोड जबकि निकासी 84 करोड रुपये की गई। इसी तरह जैसे-जैसे ‘भ्रष्टाचार की गंगा’ में पानी बढ़ता गया वैसे-वैसे निकासी की राशि भी ‘सुरसा की मुंह’ की तरह बढ़ता गया।

वित्तीय वर्ष 1991-92 में पशुपालन विभाग में आवंटन की कुल राशि 59 करोड थी जबकि इस वर्ष में निकासी 129 करोड की गई। इसी तरह 1992-93 में इसी विभाग में कुल आवंटन की राशि 66 करोड रुपये थी जबकि निकासी 154 करोड और 1993-94 में कुल आवंटन राशि 74 करोड और निकासी 199 करोड तक पहुंच गई। इसका तात्पर्य है कि बजटीय उपबंध से ज्यादा राशि की निकासी की गई।

यही कारण है कि मेरा कहना है कि राजनीति में अभी नौनिहाल ’ट्विटर बउआ’ को भ्रष्टाचार का अर्थशास्त्र सिखने के लिए विदेश जाने की जरूरत नहीं है। उनके राजनीति गुरु अभी जमानत पर घर पर ही हैं, इस कारण वह अभी इसकी शिक्षा घर पर ही ले सकते हैं।

वैसे ’बउआ’ को एक नसीहत है कि इस शिक्षा का दुष्परिणाम भी है। आज जहां आपके राजनीति गुरु और पिताजी हैं, वही इस शिक्षा की मंजिल है।

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