Home दुनिया सावधान! ‘असहिष्णुता ब्रिगेड’ ने फिर शुरू कर दी देश को बदनाम करने की मुहिम

सावधान! ‘असहिष्णुता ब्रिगेड’ ने फिर शुरू कर दी देश को बदनाम करने की मुहिम

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15 जुलाई को लंदन में अभिनेता सैफ अली खान ने कहा, ‘’भारत में सरकार की आलोचना करने पर आपकी हत्या भी हो सकती है।‘’ गौरतलब है ये वही शख्स है जिसकी पत्नी करीना कपूर खान ने कठुआ कांड को लेकर देश को बदनाम करने के लिए मुहिम चलाया था। हिंदुस्तानी होने पर भी शर्मिंदगी जताई थी।

दरअसल देश में कांग्रेस से उपकृत पत्रकार, राजनीतिज्ञ, बॉलीवुड के कई कलाकार और तथाकथित बुद्धिजीवी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरुद्ध लगातार दुष्प्रचार कर रहे हैं।

गौरतलब है कि 2015 में भी अवॉर्ड वापसी ‘गिरोह’ ने ‘असहिष्णुता’ के नाम पर देश को बदनाम किया था। हालांकि वास्तविकता यह थी कि बिहार चुनाव के बाद यह ‘नाटक’ अचानक बंद हो गया था। एक बार फिर 2019 में आम चुनाव की तैयारियां शुरू हैं और ‘असहिष्णुता ब्रिगेड’ जाग रहा है। बीते दिनों कुछ ऐसे वाकये हुए हैं जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि ये गिरोह कांग्रेस को फायदा पहुंचाने के लिए देश को बदनाम करने में भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगा।

अरुंधति रॉय ने विदेशी धरती पर देश को किया बदनाम
लेखिका अरुंधति रॉय ने 4 जून को बीबीसी के एक कार्यक्रम में कहा कि भारत में डर का माहौल है। उन्होंने कहा कि देश में मुस्लिम समुदाय को अलग-थलग किया जा रहा है। लोगों को सड़कों पर पीट-पीट कर मारा जा रहा है और उनकी आर्थिक गतिविधियों पर रोक लगाई जा रही है। दरअसल अरुंधति राय प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करती रही हैं, लेकिन इस विरोध में वह देश हित के विरोध पर उतर आई हैं। वह विदेश की धरती पर बैठकर देश के बारे में नाकारात्मक तैयार करने के एजेंडे पर आगे बढ़ रही हैं।

साजिश के तहत बरखा दत्त ने धमकी की बात फैलाई
छह जून को जानी-मानी पत्रकार बरखा दत्त ने भी एक ट्वीट कर कहा कि उन्हें सत्ता में बैठे कुछ लोगों के द्वारा धमकियां दी जा रही हैं। उनपर और उनके परिवार पर नजर रखी जा रही है और उन्हें अपना काम करने से रोका जा रहा है। जाहिर है बरखा दत्त ने गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन इन्होंने पुलिस में कोई शिकायत नहीं की और न ही कोर्ट जाना ही मुनासिब समझा। उन्होंने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री को संज्ञान लेने को जरूर आग्रह किया है, लेकिन सवाल उठते हैं कि इतने वरिष्ठ पत्रकार को क्या इतनी भी समझ नहीं है कि जिस सत्ता को वह धमकियां देने के लिए कठघरे में खड़े कर रही है, उसी इस्टेब्लिसमेंट से ट्वीट पर संज्ञान लेने को कह रही हैं। जाहिर है यह सब एक सोची समझी साजिश के तहत किया जा रहा है।

रवीश कुमार ने झूठ बोल कर देश को गुमराह किया
25 मई को एनडीटीवी के पत्रकार और एंकर रवीश कुमार ने 9 बजे के प्राइम टाइम में खुद को जान से मारने की धमकी दिए जाने की खबर दिखाई। उन्होंने बताया कि एक खास विचारधारा के लोग उन्हें धमका रहे हैं। करीब चालीस देशों से फोन करके धमकी दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में ‘असहिष्णुता’ का वातावरण है।

हालांकि तथ्य यह है कि रवीश कुमार ने न तो इस घटना की शिकायत पुलिस में की और न ही वे कोर्ट की ही शरण में गए। जाहिर है कि रवीश कुमार कोई भी सबूत पेश करने को तैयार नहीं हैं, बस बता रहे हैं की धमकियां मिल रही हैं। जाहिर है उनका उनका एजेंडा स्पष्ट है कि देश में ‘डर’ का माहौल बताकर उसका राजनीतिक लाभ लिया जाए।

प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में चर्चों से निकल रहे फतवे
दिल्ली के आर्कबिशप अनिल काउंटो ने मोदी सरकार को देश के धर्मनिरपेक्ष महौल के लिए खतरा बताया। 08 मई, 2018 को उन्होंने देश के सभी चर्च के पादरियों को पत्र लिखा कि 2019 के चुनाव में सरकार बदलने के लिए उन्हें शुक्रवार को प्रार्थना करनी चाहिए। एक जून को गोवा के आर्कबिशप फादर फिलिप नेरी फेर्राओ ने भी ईसाई समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि देश में संविधान खतरे में है और मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। इससे पहले 21 नवंबर, 2017 को गुजरात में गांधीनगर चर्च के प्रधान पादरी थॉमस मैक्वेन ने भी हिंदू राष्ट्रवादियों की पार्टी बीजेपी को हराने और ईसाई सोनिया गांधी की पार्टी कांग्रेस को जिताने की अपील की थी। वहीं कैराना और कर्नाटक चुनाव से पहले दारुल उलूम देवबंद ने मुस्लिमों को भाजपा के विरोध में मतदान करने का फतवा जारी किया था।

बीजेपी विरोध के नाम पर असहिष्णुता ब्रिगेड का ‘दोगलापन’
31 मई को बंगाल में 18 साल के दलित युवक त्रिलोचन महतो को टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने फांसी पर लटका दिया। एक जून को 32 साल के दलित नौजवान दुलाल कुमार को भी बिजली के टावर से लटका कर मार दिया गया। लेकिन कहीं कोई विरोध नहीं हुआ और ‘असहिष्णुता गैंग’ के लोगों ने कोई आवाज ही उठाई।

न कोई दलित एक्टिविस्ट, न जिग्नेश मेवनी, न रवीश कुमार, न बरखा दत्त, न प्रकाश अंबेडर और न ही अरुंधति राय ने ही अपनी जुबान खोली। दलितों के मसीहा दिखाने की कोशिश कर रहे राहुल गांधी ने भी एक शब्द तक नहीं कहा। शायद इन लोगों के एजेंडे में बीजेपी के दलित फिट नहीं बैठते हैं, इसलिए चुप्पी ही सही!

न कोई दलित एक्टिविस्ट, न जिग्नेश मेवनी, न रवीश कुमार, न बरखा दत्त, न प्रकाश अंबेडर और न ही अरुंधति राय ने ही अपनी जुबान खोली। दलितों के मसीहा दिखाने की कोशिश कर रहे राहुल गांधी ने भी एक शब्द तक नहीं कहा। शायद इन लोगों के एजेंडे में बीजेपी के दलित फिट नहीं बैठते हैं, इसलिए चुप्पी ही सही!

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